कंगना की हौसला अफजाई के लिए जरूर देखें ये फिल्म
Rating: 3*
अगर आप सिमरन से ये उम्मीद कर रहे हैं कि ये दूसरी क्वीन है तो आपको धक्का लग सकता है। यह फिल्म क्वीन की तरह मनोरंजन से भरपूर नहीं है। न उस तरह का संगीत है न कहानी। बस केवल कंगना ही कंगना है। कंगना रनौत ने इस फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब वे उस पोजिशन में पहुंच चुकी हैं कि उन्हें किसी भी स्टार को अपनी फिल्म में लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि इसे आप उनका अति आत्मविश्वास भी कह सकते हैं लेकिन अगर अब कंगना को ऐसा लगता है तो कोई क्या कर सकता है?
कंगना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा है कि अगर अपने रवैये के कारण फिल्म इंडस्ट्री में उन पर लोग बैन भी लगा देते हैं तो उन्हें इसकी फिक्र नहीं है। वे तीन-तीन नेशनल अवार्ड जीत चुकी हैं और सिरे से तीन-तीन सुपर हिट (क्वीन, तनु वेड्स मनु व तनु वेड्स मनु रिटर्नंस)फिल्में दे चुकी हैं। ऐसे में अगर उनका कैरियर खत्म भी हो जाता है तो उन्हें कोई परवाह नहीं। इंडस्ट्री में गुटबाजी, भाई-भतीजावाद जैसे मुद्दों से आजिज आ चुकी कंगना रनौत ने अब अपना तरीका अपनाया है बालीवुड से पंगा लेने का।
सिमरन के साथ कंगना ने प्रोडक्शन की कमान भी संभाल ली है। यानी अब वे अपनी मर्जी की फिल्म करेंगी अपनी मर्जी के निर्देशक के साथ काम करेंगी और अपनी इच्छा से स्टार चुनेंगी। और इसी वजह से सिमरन में कोई बड़ा स्टार नहीं लिया गया है। छोटे से छोटे रोल में भी नए व अपेक्षाकृत कम पापुलर कलाकारों को कास्ट किया गया है। मैं अपनी बात करूं तो पूरी फिल्म की जितनी भी स्टार कास्ट है उनमें से किसी का नाम मुझे नहीं पता। उनके नाम जानने के लिए मुझे गूगल पर सर्च करना होगा और यह मैं करना नहीं चाहता।
कंगना की पिछली फिल्म रंगून जब बाक्स आफिस पर ढेर हो गई थी तो इंडस्ट्री का एक बड़ा तबका बहुत खुश हुआ था। पार्टियां हुई थी। कंगना ने इतने लोगों से पंगे लिए हैं कि वे उनकी नाकामयाबी को सेलीब्रेट कर रहे हैं। अब सिमरन बाक्स आफिस पर क्या करिश्मा दिखाती है यह तो एक हफ्ते में पता चल ही जाएगा लेकिन यहां हम बात करते हैं इस फिल्म के खास बातों पर।
प्रफुल्ल पटेल (कंगना) गुजराती परिवार से है और अपने मां-बाप के साथ अमेरिका में रहती है। होटल में हाउसकीपिंग का जॉब करती है। अपने पैसे एकत्र करके घर खरीदना चाहती है। तलाक हो चुका है, 30 साल की आयु पार कर चुकी है लेकिन बिंदास जीने की तमन्ना उसके मन में है। एक दिन जुए में इत्तेफाक से कुछ पैसे जीत जाती है तो जुए में रिस्क उठाकर अपने घर के लिए जमा किए हुए पैसे भी हार जाती है। कुछ लोगों से पैसा उधार ले लेती है और उन्हें भी जुए में हार जाती है। उनका उधार चुकाने के लिए चोरी करने लगती है, बैंक लूटने लगती है। मां-बाप शादी के लिए जोर डालते हैं तो पैसे के लालच में उसके लिए भी तैयार हो जाती है। उसे देखने आया लड़का भी उसे पसंद करता है। वह पैसे से उसकी मदद करना चाहता है लेकिन खुद्दार कंगना को यह पसंद नहीं आता। अंत में कंगना गिरफ्तार हो जाती है और 10 महीने की सजा उसे हो जाती है।
फिल्म का अंत सुखद और मजेदार है। पर फिल्म उतनी जोरदार नहीं है जितनी होनी चाहिए थी। मनोरंजन कम है। गीत-संगीत कुछ खास नहीं है। अगर कुछ देखने लायक है तो है वो है कंगना का अभिनय। कंगना ने क्वीन से कमतर काम नहीं किया है। बस लोगों को यह कहानी, जो कहा जा रहा है सत्यकथा पर आधारित है, शायद हजम नहीं हो। कंगना के अभिनय में उनके निजी जीवन के संघर्ष व उतार चढ़ाव की झलक नजर आती है। एक आम हिंदुस्तानी लड़की का अंग्रेजी बोलने का जो अंदाज उन्होंने दिखाया है वो दर्शकों को खूब हंसाता है। कंगना का अभिनय तो खैर है ही स्वाभाविक। लगता ही नहीं है कि वे एक्टिंग कर रही हैं। वे किरदार में इतना घुस जाती हैं कि लगता है कि जैसे वे चरित्र को ही जी रही हैं।
फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता हैं। वे इससे पहले कई जबर्दस्त व पुरस्कार विजेता (अलीगढ़, शाहिद व सिटीलाइट) फिल्में बना चुके हैं लेकिन मैंने उनकी यह पहली फिल्म देखी है। अपनी निर्देशन क्षमता से उन्होंने कोई खास प्रभावित नहीं किया। फिल्म में हर सीन में कंगना ही नजर आती हैं और हंसल भी लगता है कि यह फिल्म कंगना के लिए ही बना रहे थे। अब तो सुनने में यह भी आ रहा है कि कंगना निर्देशक भी बन रही हैं। यानी कंगना ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री से ही ठान ली है। ऐसे में उनका हौसला तो बढ़ाने की जरूरत है। इसलिए यह फिल्म एक बार जरूर देखें और इस साहसी अभिनेत्री की हौसला अफजाई करें।
- हर्ष कुमार सिंह
Rating: 3*
अगर आप सिमरन से ये उम्मीद कर रहे हैं कि ये दूसरी क्वीन है तो आपको धक्का लग सकता है। यह फिल्म क्वीन की तरह मनोरंजन से भरपूर नहीं है। न उस तरह का संगीत है न कहानी। बस केवल कंगना ही कंगना है। कंगना रनौत ने इस फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब वे उस पोजिशन में पहुंच चुकी हैं कि उन्हें किसी भी स्टार को अपनी फिल्म में लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि इसे आप उनका अति आत्मविश्वास भी कह सकते हैं लेकिन अगर अब कंगना को ऐसा लगता है तो कोई क्या कर सकता है?
कंगना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा है कि अगर अपने रवैये के कारण फिल्म इंडस्ट्री में उन पर लोग बैन भी लगा देते हैं तो उन्हें इसकी फिक्र नहीं है। वे तीन-तीन नेशनल अवार्ड जीत चुकी हैं और सिरे से तीन-तीन सुपर हिट (क्वीन, तनु वेड्स मनु व तनु वेड्स मनु रिटर्नंस)फिल्में दे चुकी हैं। ऐसे में अगर उनका कैरियर खत्म भी हो जाता है तो उन्हें कोई परवाह नहीं। इंडस्ट्री में गुटबाजी, भाई-भतीजावाद जैसे मुद्दों से आजिज आ चुकी कंगना रनौत ने अब अपना तरीका अपनाया है बालीवुड से पंगा लेने का।
सिमरन के साथ कंगना ने प्रोडक्शन की कमान भी संभाल ली है। यानी अब वे अपनी मर्जी की फिल्म करेंगी अपनी मर्जी के निर्देशक के साथ काम करेंगी और अपनी इच्छा से स्टार चुनेंगी। और इसी वजह से सिमरन में कोई बड़ा स्टार नहीं लिया गया है। छोटे से छोटे रोल में भी नए व अपेक्षाकृत कम पापुलर कलाकारों को कास्ट किया गया है। मैं अपनी बात करूं तो पूरी फिल्म की जितनी भी स्टार कास्ट है उनमें से किसी का नाम मुझे नहीं पता। उनके नाम जानने के लिए मुझे गूगल पर सर्च करना होगा और यह मैं करना नहीं चाहता।
कंगना की पिछली फिल्म रंगून जब बाक्स आफिस पर ढेर हो गई थी तो इंडस्ट्री का एक बड़ा तबका बहुत खुश हुआ था। पार्टियां हुई थी। कंगना ने इतने लोगों से पंगे लिए हैं कि वे उनकी नाकामयाबी को सेलीब्रेट कर रहे हैं। अब सिमरन बाक्स आफिस पर क्या करिश्मा दिखाती है यह तो एक हफ्ते में पता चल ही जाएगा लेकिन यहां हम बात करते हैं इस फिल्म के खास बातों पर।
प्रफुल्ल पटेल (कंगना) गुजराती परिवार से है और अपने मां-बाप के साथ अमेरिका में रहती है। होटल में हाउसकीपिंग का जॉब करती है। अपने पैसे एकत्र करके घर खरीदना चाहती है। तलाक हो चुका है, 30 साल की आयु पार कर चुकी है लेकिन बिंदास जीने की तमन्ना उसके मन में है। एक दिन जुए में इत्तेफाक से कुछ पैसे जीत जाती है तो जुए में रिस्क उठाकर अपने घर के लिए जमा किए हुए पैसे भी हार जाती है। कुछ लोगों से पैसा उधार ले लेती है और उन्हें भी जुए में हार जाती है। उनका उधार चुकाने के लिए चोरी करने लगती है, बैंक लूटने लगती है। मां-बाप शादी के लिए जोर डालते हैं तो पैसे के लालच में उसके लिए भी तैयार हो जाती है। उसे देखने आया लड़का भी उसे पसंद करता है। वह पैसे से उसकी मदद करना चाहता है लेकिन खुद्दार कंगना को यह पसंद नहीं आता। अंत में कंगना गिरफ्तार हो जाती है और 10 महीने की सजा उसे हो जाती है।
फिल्म का अंत सुखद और मजेदार है। पर फिल्म उतनी जोरदार नहीं है जितनी होनी चाहिए थी। मनोरंजन कम है। गीत-संगीत कुछ खास नहीं है। अगर कुछ देखने लायक है तो है वो है कंगना का अभिनय। कंगना ने क्वीन से कमतर काम नहीं किया है। बस लोगों को यह कहानी, जो कहा जा रहा है सत्यकथा पर आधारित है, शायद हजम नहीं हो। कंगना के अभिनय में उनके निजी जीवन के संघर्ष व उतार चढ़ाव की झलक नजर आती है। एक आम हिंदुस्तानी लड़की का अंग्रेजी बोलने का जो अंदाज उन्होंने दिखाया है वो दर्शकों को खूब हंसाता है। कंगना का अभिनय तो खैर है ही स्वाभाविक। लगता ही नहीं है कि वे एक्टिंग कर रही हैं। वे किरदार में इतना घुस जाती हैं कि लगता है कि जैसे वे चरित्र को ही जी रही हैं।
फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता हैं। वे इससे पहले कई जबर्दस्त व पुरस्कार विजेता (अलीगढ़, शाहिद व सिटीलाइट) फिल्में बना चुके हैं लेकिन मैंने उनकी यह पहली फिल्म देखी है। अपनी निर्देशन क्षमता से उन्होंने कोई खास प्रभावित नहीं किया। फिल्म में हर सीन में कंगना ही नजर आती हैं और हंसल भी लगता है कि यह फिल्म कंगना के लिए ही बना रहे थे। अब तो सुनने में यह भी आ रहा है कि कंगना निर्देशक भी बन रही हैं। यानी कंगना ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री से ही ठान ली है। ऐसे में उनका हौसला तो बढ़ाने की जरूरत है। इसलिए यह फिल्म एक बार जरूर देखें और इस साहसी अभिनेत्री की हौसला अफजाई करें।
- हर्ष कुमार सिंह
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