विरोध मेंः
संस्कारी का टैग पा चुके सेंसर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पहलाज निहलानी के पास अब किसी सवाल का जवाब नहीं है। एक महीने पहले सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पद से अपमानजनक तरीके से हटा दिए गए पहलाज निहलानी बतौर वितरक अपनी पहली फिल्म की हिरोईन की खूबसूरती की तारीफ करके सारे सवालों से किनारा करते नजर आए। ऐसा ही होता है, कहते हैं सवाल करने से आसान काम कुछ नहीं लेकिन जब जवाब देने की बारी आती है तो पसीने छूट जाते हैं।
एक साल पहले उड़ता पंजाब फिल्म को पास करने से इनकार कर देने वाले पहलाज निहलानी अब खुद उसी स्थिति में खड़े नजर आ रहे हैं जहां कुछ समय पहले तक वे दूसरों को किया करते थे। 90 के दशक में बालीवुड के एक कामयाब निर्माता रहे पहलाज निहलानी केंद्र में मोदी सरकार के गठन के समय सेंसर बोर्ड के चेयरमैन बनाए गए थे। उसके बाद से कोई महीना ऐसा नहीं गया जब पहलाज निहलानी अपने दायित्व को निभाते समय किसी विवाद में न फंसे हों। किसी भी फिल्म में इंटीमेट सींस हों या फिर कोई ऐसा डायलाग हो जिसमें कोई राजनीतिक एंगल उन्हें नजर आता हो तो समझ लीजिए आपकी फिल्म फंस गई। इंतहा तो उस समय हो गई जब उड़ता पंजाब को उन्होंने पास करने से केवल इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि इसमें देश के एक राज्य की छवि धूमिल हो रही थी। अमूमन सामान्य तौर पर सॉफ्ट टारगेट बन जाने वाली पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके खिलाफ उठ खड़ी हुई और पहलाज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसमें अनुराग कश्यप, एकता कपूर, अभिषेक कपूर, मुकेश भट्ट, महेश भट्ट जैसे बड़े नाम शामिल थे। खैर फिल्म रिलीज भी हुई थी और अच्छा खासा बिजनेस भी करने में सफल रही थी।
बहरहाल पहलाज पर लगातार उठ रही उंगलियों के बाद सरकार ने खुद को असहज स्थिति से बचाने के लिए पहलाज से किनारा कर लिया। जैसे ही स्मृति ईरानी सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनी वैसे ही पहलाज को हटाकर लेखक प्रसून जोशी को सेंसर बोर्ड की कमान सौंप दी गई।
अब पहलाज निहलानी दूसरे फिल्म निर्माताओं की तरह ही हैं और लंबे समय से डिब्बे में बंद पड़ी फिल्म जूली 2 को रिलीज करने जा रहे हैं। फिल्म में दक्षिण की अभिनेत्री राय लक्ष्मी लीड स्टार हैं और निर्देशक हैं दीपक शिवदासानी। दीपक व पहलाज का पुराना व्यवसायिक रिश्ता रहा है। 90 के दशक में दीपक ने पहलाज के लिए भी कुछ फिल्में बनाई थीं लेकिन पिछले कुछ साल से दीपक गायब से हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने नेहा धूपिया को लेकर जूली फिल्म बनाई थी जो अपने बोल्ड सींस की वजह से ही याद की जाती है। नेहा ने इसमें एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था। हालांकि फिल्म बहुत बड़ी हिट नहीं थी लेकिन नुकसान में भी नहीं रही थी। सीक्वल फिल्मों के दौर में दीपक ने कन्नड़ अभिनेत्री राय लक्ष्मी के साथ इस फिल्म को बनाया और दो साल से यह फिल्म रिलीज की राह तक रही है। वजह, वितरक नहीं मिल रहे। और जानते हैं इसे रिलीज करने का बीड़ा उठाया तो किसने ? अपने संस्कारी पहलाज निहलानी ने। फिल्म 6 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है और इसी सिलसिले में पहलाज व फिल्म की टीम ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। अब जब से चेयरमैन पद से हटे हैं तब से पहलाज मीडिया के घेरे में आए ही नहीं थे और आज मौका था। सवालों की शुरूआत भी पहलाज से ही हुई और अंत भी। मजेदार बात यह थी कि पहलाज सवालों का जवाब देते हुए इतने नर्वस नजर आए कि वे सवाल क्या पूछा जा रहा है और उसका क्या जवाब देना चाहिए ये उन्हें सूझा ही नहीं। सवाल कुछ भी था बस जवाब यही था कि मैंने सेंसर बोर्ड में रहते हुए कुछ भी गलत नहीं किया। हां उन्होंने यह जरूर कहा कि आप लोग फिल्म देखने से पहले ही यह ओपिनियन क्यों बना रहे हैं कि फिल्म में आपत्तिजनक सींस होंगे। मीडियाकर्मी भी कम नहीं थे। सवाल उछला कि पहला पार्ट सबने देखा है और उसमें इतने हॉट सींस थे फिर यह कैसे मान लिया जाए कि इसमें नहीं होंगे ? बहरहाल फिल्म के निर्माता निर्देशक को बीच में कूदना पड़ा और बात को फिल्म की दिशा में मोड़ने की कोशिश की लेकिन मीडिया के हमले कम नहीं हुए। अंत में पहलाज को यही कहना पड़ा कि इस फिल्म में इतनी सुंदर हिरोईन है और आप किसी चक्कर में पड़े हुए हैं। फिल्म देखिए और इसके बाद फैसला कीजिए।
समर्थन मेंः
पहलाज निहलानी का नाम आते ही सेंसर बोर्ड के चेयरमैन के रूप में उनकी कथित तौर पर कट्टर संस्कारी छवि ही सामने उभर आती है। आलोचनाएं करते समय लोग यह भी भूल जाते हैं कि 90 के दशक में मनोरंजक फिल्में पेश करने का कीर्तिमान भी पहलाज निहलानी के नाम रहा है। बतौर सेंसर बोर्ड चीफ उनकी कार्य प्रणाली कुछ ज्यादा ही टारगेट पर रही। सेंसर की कैंची जब भी उन्होंने उठाई तब-तब उनकी बनाई गई फिल्मों के अश्लील संवादों व डबल मीनिंग डायलाग्स की चर्चा मीडिया ने जोर-शोर से की।
सेंसर बोर्ड का चेयरमैन रहते समय उन्होंने जो भी काम किया या फिल्मों को प्रमाण पत्र देते समय जो भी नजरिया अपनाया उसे लेकर सवाल तो बहुत उठे लेकिन इस पर एतरफा हमले ही ज्यादा हुए। हर बार यह मान लिया गया कि पहलाज कुछ गलत कर रहे हैं। इसके अन्य पहलुओं पर बहस, जिसकी गुंजाइश थी, नहीं हुई।
उड़ता पंजाब की ही बात करें। इस फिल्म को देखने के बाद पंजाब के लोगों में इस ओपनियन ने भी जन्म लिया कि यह फिल्म उनके राज्य के बारे में बहुत ही गलत छवि पेश कर रही है। पहले पंजाब का नाम आते ही जहां लहलहाते खेत, भंगड़ा करते युवक व गिद्धा डालती युवतियों की छवि उभर आती थी वहीं अब पंजाब का नाम चिट्टा यानी ड्रग्स से जुड़ गया। हालांकि इस तरह की आवाजें राजनीतिक ज्यादा थीं। पंजाब में विधानसभा चुनाव सिर पर थे और वहां की अकाली-भाजपा सरकार लगातार इसे लेकर निशाने पर थी कि स्टेट में नशे का कारोबार बहुत फैल गया है। और यह फिल्म ठीक चुनाव से कुछ समय पहले रिलीज हो रही थी। तमाम दबावों के बाद फिल्म रिलीज तो जरूर हो गई थी लेकिन यह महसूस किया गया था कि वास्तव में यह फिल्म पंजाब जैसे खुशहाल राज्य की बहुत ही डार्क छवि सामने लाती है।
अब जबकि पहलाज निहलानी सेंसर बोर्ड चेयरमैन नहीं रहे हैं और फिर से अपने निर्माण व वितरण के धंधे में वापसी कर रहे हैं तो उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है। जूली 2 के नाम से बनी एक फिल्म, जो लगभग 2 साल से रिलीज की राह तक रही है, को पहलाज रिलीज करने जा रहे हैं। उन्होंने सोमवार को इसके ट्रेलर रिलीज इवेंट में मीडिया के बहुत कड़े सवालों का सामना किया। इस प्रेस कांफ्रेंस में सारे सवाल उसी दिशा में रहे। आपने चेयरमैन रहते हुए तो दूसरों की फिल्मों पर सवाल उठाए और अब आप ही ऐसी बोल्ड फिल्म रिलीज करने जा रहे हैं ? सवाल उठना वाजिब ही है लेकिन इस पर पहलाज ने अपनी राय दी कि आप फिल्म को देखने से पहले ही क्यों अपनी धारणा बना रहे हैं। पहलाज ने कहा- फिल्म को यू/ए सर्टीफिकेट दिया गया है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। इसके बावजूद वे मीडिया के सवालों को लगातार झेलते रहे और यही कहने का प्रयास करते रहे कि आप पहले फिल्म देख तो लें।
यहां अहम सवाल यह भी उठता है कि क्या बतौर निर्माता या वितरक भी पहलाज ऐसे सवालों का ही हमेशा जवाब देते रहेंगे? सोशल मीडिया ने भी उन पर कड़ी प्रतिक्रया दी है। सोशलाइट सुहेल सेठ ने टि्वटर पर चुटकी भी ले डाली- चलिए लगता है कि पहलाज अब सेंसर बोर्ड चीफ के दायित्व से मुक्त हो गए हैं और खुद को डिलाइटिड फील कर रहे हैं कि वे हमारे लिए जूली 2 जैसी फिल्म पेश कर सकें। सुहेल सेठ खुद बालीवुड से जुड़े रहे हैं लेकिन पहलाज निहलानी का सेंसर बोर्ड चेयरमैन के रूप में कामकाज शायद उन्हें इतना अखरा कि वे उनके समर्थन के लिए खुद को तैयार नहीं कर सके।
बालीवुड से उनके समर्थन में एक आवाज नहीं उठी है। बात-बात पर ट्वीट कर देने वाला बालीवुड अब खामोशी का रुख अख्तयार कर चुका है। ऐसे में पहलाज खुद को अकेला ही खड़ा महसूस करेंगे।
इस मुद्दे पर बहुत ज्यादा बहस नहीं की गई कि क्या सेंसर बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने जो भी किया था उसके लिए क्या ऊपर से उन्हें कोई गाइड लाइन दी गई थी? क्या सही है क्या गलत है, क्या पास किया जाए और क्या नहीं, इसे लेकर क्या उन्हें कोई दिशा दी गई थी ? इस पर कोई चर्चा नहीं हुई और बस चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल खत्म होने के साथ ही शायद संतुष्टि के भाव ने जन्म ले लिया और अब शायद पहलाज निशाने पर ही बने रहेंगे।
- हर्ष कुमार सिंह
संस्कारी का टैग पा चुके सेंसर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पहलाज निहलानी के पास अब किसी सवाल का जवाब नहीं है। एक महीने पहले सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पद से अपमानजनक तरीके से हटा दिए गए पहलाज निहलानी बतौर वितरक अपनी पहली फिल्म की हिरोईन की खूबसूरती की तारीफ करके सारे सवालों से किनारा करते नजर आए। ऐसा ही होता है, कहते हैं सवाल करने से आसान काम कुछ नहीं लेकिन जब जवाब देने की बारी आती है तो पसीने छूट जाते हैं।
एक साल पहले उड़ता पंजाब फिल्म को पास करने से इनकार कर देने वाले पहलाज निहलानी अब खुद उसी स्थिति में खड़े नजर आ रहे हैं जहां कुछ समय पहले तक वे दूसरों को किया करते थे। 90 के दशक में बालीवुड के एक कामयाब निर्माता रहे पहलाज निहलानी केंद्र में मोदी सरकार के गठन के समय सेंसर बोर्ड के चेयरमैन बनाए गए थे। उसके बाद से कोई महीना ऐसा नहीं गया जब पहलाज निहलानी अपने दायित्व को निभाते समय किसी विवाद में न फंसे हों। किसी भी फिल्म में इंटीमेट सींस हों या फिर कोई ऐसा डायलाग हो जिसमें कोई राजनीतिक एंगल उन्हें नजर आता हो तो समझ लीजिए आपकी फिल्म फंस गई। इंतहा तो उस समय हो गई जब उड़ता पंजाब को उन्होंने पास करने से केवल इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि इसमें देश के एक राज्य की छवि धूमिल हो रही थी। अमूमन सामान्य तौर पर सॉफ्ट टारगेट बन जाने वाली पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके खिलाफ उठ खड़ी हुई और पहलाज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसमें अनुराग कश्यप, एकता कपूर, अभिषेक कपूर, मुकेश भट्ट, महेश भट्ट जैसे बड़े नाम शामिल थे। खैर फिल्म रिलीज भी हुई थी और अच्छा खासा बिजनेस भी करने में सफल रही थी।
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| प्रेस कांफ्रेंस में पहलाज निहलानी |
अब पहलाज निहलानी दूसरे फिल्म निर्माताओं की तरह ही हैं और लंबे समय से डिब्बे में बंद पड़ी फिल्म जूली 2 को रिलीज करने जा रहे हैं। फिल्म में दक्षिण की अभिनेत्री राय लक्ष्मी लीड स्टार हैं और निर्देशक हैं दीपक शिवदासानी। दीपक व पहलाज का पुराना व्यवसायिक रिश्ता रहा है। 90 के दशक में दीपक ने पहलाज के लिए भी कुछ फिल्में बनाई थीं लेकिन पिछले कुछ साल से दीपक गायब से हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने नेहा धूपिया को लेकर जूली फिल्म बनाई थी जो अपने बोल्ड सींस की वजह से ही याद की जाती है। नेहा ने इसमें एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था। हालांकि फिल्म बहुत बड़ी हिट नहीं थी लेकिन नुकसान में भी नहीं रही थी। सीक्वल फिल्मों के दौर में दीपक ने कन्नड़ अभिनेत्री राय लक्ष्मी के साथ इस फिल्म को बनाया और दो साल से यह फिल्म रिलीज की राह तक रही है। वजह, वितरक नहीं मिल रहे। और जानते हैं इसे रिलीज करने का बीड़ा उठाया तो किसने ? अपने संस्कारी पहलाज निहलानी ने। फिल्म 6 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है और इसी सिलसिले में पहलाज व फिल्म की टीम ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। अब जब से चेयरमैन पद से हटे हैं तब से पहलाज मीडिया के घेरे में आए ही नहीं थे और आज मौका था। सवालों की शुरूआत भी पहलाज से ही हुई और अंत भी। मजेदार बात यह थी कि पहलाज सवालों का जवाब देते हुए इतने नर्वस नजर आए कि वे सवाल क्या पूछा जा रहा है और उसका क्या जवाब देना चाहिए ये उन्हें सूझा ही नहीं। सवाल कुछ भी था बस जवाब यही था कि मैंने सेंसर बोर्ड में रहते हुए कुछ भी गलत नहीं किया। हां उन्होंने यह जरूर कहा कि आप लोग फिल्म देखने से पहले ही यह ओपिनियन क्यों बना रहे हैं कि फिल्म में आपत्तिजनक सींस होंगे। मीडियाकर्मी भी कम नहीं थे। सवाल उछला कि पहला पार्ट सबने देखा है और उसमें इतने हॉट सींस थे फिर यह कैसे मान लिया जाए कि इसमें नहीं होंगे ? बहरहाल फिल्म के निर्माता निर्देशक को बीच में कूदना पड़ा और बात को फिल्म की दिशा में मोड़ने की कोशिश की लेकिन मीडिया के हमले कम नहीं हुए। अंत में पहलाज को यही कहना पड़ा कि इस फिल्म में इतनी सुंदर हिरोईन है और आप किसी चक्कर में पड़े हुए हैं। फिल्म देखिए और इसके बाद फैसला कीजिए।
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| जूली 2 की हिरोइन राय लक्ष्मी प्रेस कांफ्रेंस में। |
पहलाज निहलानी का नाम आते ही सेंसर बोर्ड के चेयरमैन के रूप में उनकी कथित तौर पर कट्टर संस्कारी छवि ही सामने उभर आती है। आलोचनाएं करते समय लोग यह भी भूल जाते हैं कि 90 के दशक में मनोरंजक फिल्में पेश करने का कीर्तिमान भी पहलाज निहलानी के नाम रहा है। बतौर सेंसर बोर्ड चीफ उनकी कार्य प्रणाली कुछ ज्यादा ही टारगेट पर रही। सेंसर की कैंची जब भी उन्होंने उठाई तब-तब उनकी बनाई गई फिल्मों के अश्लील संवादों व डबल मीनिंग डायलाग्स की चर्चा मीडिया ने जोर-शोर से की।
सेंसर बोर्ड का चेयरमैन रहते समय उन्होंने जो भी काम किया या फिल्मों को प्रमाण पत्र देते समय जो भी नजरिया अपनाया उसे लेकर सवाल तो बहुत उठे लेकिन इस पर एतरफा हमले ही ज्यादा हुए। हर बार यह मान लिया गया कि पहलाज कुछ गलत कर रहे हैं। इसके अन्य पहलुओं पर बहस, जिसकी गुंजाइश थी, नहीं हुई।
उड़ता पंजाब की ही बात करें। इस फिल्म को देखने के बाद पंजाब के लोगों में इस ओपनियन ने भी जन्म लिया कि यह फिल्म उनके राज्य के बारे में बहुत ही गलत छवि पेश कर रही है। पहले पंजाब का नाम आते ही जहां लहलहाते खेत, भंगड़ा करते युवक व गिद्धा डालती युवतियों की छवि उभर आती थी वहीं अब पंजाब का नाम चिट्टा यानी ड्रग्स से जुड़ गया। हालांकि इस तरह की आवाजें राजनीतिक ज्यादा थीं। पंजाब में विधानसभा चुनाव सिर पर थे और वहां की अकाली-भाजपा सरकार लगातार इसे लेकर निशाने पर थी कि स्टेट में नशे का कारोबार बहुत फैल गया है। और यह फिल्म ठीक चुनाव से कुछ समय पहले रिलीज हो रही थी। तमाम दबावों के बाद फिल्म रिलीज तो जरूर हो गई थी लेकिन यह महसूस किया गया था कि वास्तव में यह फिल्म पंजाब जैसे खुशहाल राज्य की बहुत ही डार्क छवि सामने लाती है।
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| मेरे मित्र कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य का ये बेहतरीन कार्टून। |
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| जूली के स्टिल में राय लक्ष्मी |
बालीवुड से उनके समर्थन में एक आवाज नहीं उठी है। बात-बात पर ट्वीट कर देने वाला बालीवुड अब खामोशी का रुख अख्तयार कर चुका है। ऐसे में पहलाज खुद को अकेला ही खड़ा महसूस करेंगे।
इस मुद्दे पर बहुत ज्यादा बहस नहीं की गई कि क्या सेंसर बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने जो भी किया था उसके लिए क्या ऊपर से उन्हें कोई गाइड लाइन दी गई थी? क्या सही है क्या गलत है, क्या पास किया जाए और क्या नहीं, इसे लेकर क्या उन्हें कोई दिशा दी गई थी ? इस पर कोई चर्चा नहीं हुई और बस चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल खत्म होने के साथ ही शायद संतुष्टि के भाव ने जन्म ले लिया और अब शायद पहलाज निशाने पर ही बने रहेंगे।
- हर्ष कुमार सिंह




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