Tuesday, 29 December 2015

A day with Sanjay Leela Bhansali at his office

'बाजीराव मस्तानी' के महान फिल्मकार संजय लीला भंसाली के मुंबई आफिस में बिताया एक यादगार दिन 
मुंबई में 20 नवंबर को “बाजीराव मस्तानी” के ट्रेलर लांच इवेंट में भाग लिया तो रणवीर सिंह व दीपिका पादुकोण का इंटरव्यू फन सिनेमा में ही हो गया लेकिन जब मैं और बाहर से कवर करने के लिए आए कुछ और पत्रकारों ने संजय लीला भंसाली से इंटरव्यू के लिए आयोजकों से कहा तो हमें बताया गया कि संजय जी इस तरह से सार्वजनिक कार्यक्रमों में बात करना पसंद नहीं करते हैं। इसलिए हमें अगले दिन उनके आफिस जाना होगा। अगले दिन होटल सन एंड सैंड से लगभग डेढ़ घंटे की ड्राइव के बाद हम जूहू के जिस इलाके में भंसाली से मिलने पहुंचे वह काफी प्रसिद्ध जगह थी। रास्ते में ड्राइवर चंद्रमा ने बताया कि वहीं पास में एकता कपूर का घर भी है। रास्ते में जब चंद्रमा ने लोगों से भंसाली का आफिस पूछा तो बार-बार ये भी हिंट दिया कि एकता कपूर के घर के पास है। इस से ये भी लग रहा था कि संजय लीला भंसाली के आफिस के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते थे।
स्वाति मित्रा नाम की सात मंजिला बिल्डिंग के सामने हम पहुंचे तो वहां काफी शांति थी। कोई ट्रैफिक नहीं था। बस एक बड़ी सी मर्सिडीज गाड़ी बैक करके इमारत की छोटी सी पार्किंग में लगाई जा रही थी। हम अपनी गाड़ी से उतरकर लिफ्ट की ओर बढ़ने लगे तो देखा की सामने ही संजय लीला भंसाली कान पर मोबाइल लगाए वहीं टहल रहे हैं। गाड़ी उन्हीं की थी। तभी लिफ्ट ( जो पुराने चैनल सिस्टम की थी) नीचे आई और भंसाली उसमें सवार होकर ऊपर चले गए। मैं और मेरे एक साथी पत्रकार, जो हैदराबाद से आए थे, भंसाली के साथ ऊपर नहीं गए। हमने बाद में जाना ही उचित समझा। हमारे साथ लिफ्ट में थे संजय के ड्राइवर। उन्होंने ही बताया कि हमें छठी मंजिल पर जाना है।
इसी बिल्डिंग की 7वीं मंजिल पर भंसाली का आफिस है।
छठी मंजिल पर संजय लीला भंसाली का सामान्य आफिस था जबकि सातवें फ्लोर पर उनका निजी कार्यालय व अपार्टमेंट। इंटरव्यू सातवें फ्लोर पर ही होना था। हम से पहले भी कुछ पत्रकार ऊपर गए हुए थे इसलिए हमें नीचे ही रुकने के लिए कहा गया। हम वहीं सोफे पर बैठ गए। ये आफिस का मुख्य हिस्सा नहीं था। आफिस के बाहर बनी एक लॉबी थी जिसे दो हिस्सों में बांटा गया था। एक और भंसाली का कुत्ता बंधा हुआ था और दूसरी ओर के हिस्से में बैठने की व्यवस्था की गई थी।यहां लगभग डेढ़ घंटा इंतजार करना अच्छा ही रहा। इस दौरान काफी कुछ जानने का समय मिल गया। इस दौरान वहीं कुछ ऐसी चीजें भी देखने के लिए मिली जो आम आदमी के लिए कभी संभव नहीं हैं। मैंने उनके आफिस का आकलन किया और पाया कि वे सादगी पसंद हैं।

उनका ये कुत्ता खूब ड्रामा करता है। एसी में सोता है और तब
तक खाना नहीं खाता जब तक सब लोग उससे दूर न हट जाएं। 

रामलीला के कास्ट्यूम व अन्य जरूरी कागजातों से भरे बक्से। 

ये ढेर लगा है बाजीराव मस्तानी की कास्ट्यूम्स का। देख कर भी
आश्चर्य हो रहा था कि क्या इतने कपड़े इस्तेमाल हुए हैं? 

आफिस में बड़े-बडे लोहे के बक्से रखे हुए थे जिन पर लिखा था कि उनमें “रामलीला” व “बाजीराव मस्तानी” की कास्ट्यूम भरी हुई हैं। इसके अलावा दीवार में बने एक शो केस के ऊपर खुले में ही कुछ ट्राफियां रखी हुई थी जो धूल फांक रही थी। इनमें फिल्मफेयर पुरस्कार के अलावा बाकी सभी ट्राफियां थीं जो समय-समय पर भंसाली को मिली होंगी। इनमें स्क्रीन, जी व स्टारडस्ट जैसे तमाम अवार्ड थे जो साल भर होते रहते हैं। देखने से लग रहा था कि भंसाली के लिए पुरस्कार के लिए कितने मायने हैं।
बाहरी हिस्से में ही रखे गए ये सभी पुरस्कार धूल ही फांक रहे हैं। 
भंसाली के निजी कक्ष में रखा गुजारिश का फ्रेम किया हुआ पोस्टर। 

यहीं बैठकर भंसाली ने बाजीराव मस्तानी की कहानी व संगीत रचा। 

मैं उनके निजी कक्ष में हूं और बाहर भंसाली अपनी टीम से
मीटिंग करते हुए साफ नजर आ रहे हैं। इसी दरवाजे से हम
उनके कक्ष में आए थे। 

इसी काउच पर बैठकर भंसाली ने हमसे बात की। 

दीवार पर लगे भंसाली के कुछ पुराने फोटो। 

उनकी कुछ अन्य फिल्मों के पोस्टर इस तरह से उनके कमरे की शोभा बढ़ा रहे हैं। 

उनके कामकाज में प्रयोग आने वाली एक और टेबल। 


उनकी मुख्य टेबल, जिस के साथ एक शानदार म्यूजिक सिस्टम भी रखा है। भंसाली
संगीत के बहुत बडे़ शौकीन हैं। 

भंसाली के स्टाफ के लोगों के बीच केवल एक ही चर्चा थी। ट्रेलर की। सभी ट्रेलर की अपनी-अपनी ओर से समीक्षा कर रहे थे। सभी के मोबाइल में ट्रेलर ही चल रहा था। वहां रखे कंप्यूटर पर भी स्क्रीन सेवर “बाजीराव मस्तानी” का ही सेट था।  इंतजार के बाद हमें सातवीं मंजिल से बुलावा आया तो वहां पहले से ही भंसाली व उनके असिस्टेंट किसी मीटिंग में बिजी थे। एक खुली छत पर शीशे से कवर करके उनका आफिस बनाया गया था। रोशनी काफी थी। सब कुछ साफ दिख रहा था। हम घुसे तो एक और खतरनाक नस्ल के कुत्ते ने हमारा स्वागत किया। हमने भंसाली का अभिवादन किया और उन्होंने मुस्कुरा कर जवाब दिया। हमें जिस कमरे में बैठाया गया उसे देखकर लगता था कि वहीं बैठकर भंसाली अपनी फिल्मों पर काम करते हैं।
भंसाली के निजी कक्ष में ये यादगार सैल्फी। 
कमरे में उनकी फिल्मों के फ्रेम किए हुए फोटो लगे हुए थे। संजय बाहर बरामदेनुमा आफिस में मीटिंग कर रहे थे और मुझे मौका मिल गया उनके निजी रूम में कुछ फोटो क्लिक करने का। मन में बार-बार ख्याल आ रहा था कि एक-एक लम्हे को कैमरे में कैद कर लूं। हालांकि साथ आई पीआर कंपनी की स्टाफर ने फोटो न लेने का आग्रह किया लेकिन उसके टोकने से पहले ही मैं कई फोटो ले चुका था और डिलीट करने का कोई इरादा नहीं था। भंसाली मीटिंग करने के बाद कुछ समय फोन पर बात करते हुए बाहर ही टहलते रहे और फिर अंदर आकर हमारे सामने आ बैठे। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी और बैठते ही बोले- जी जनाब फरमाइये। मेरे मुंह से अचानक ही निकल गया- सर किसी को फिल्मकार को कुर्ते-पायजामे में देखता हूं तो बहुत अच्छा लगता है। संजय मुस्कुरा दिए। इसके बाद इंटरव्यू हुआ (जो आप पहले ही मेरे ब्लाग में दो भागों में पढ़ चुके हैं। यू ट्यूब पर भी आप सर्च करेंगे तो ये मिल जाएगा)।
सैल्फी नंबर 1

इंटरव्यू के बाद सैल्फी क्लिक कराई तो भंसाली बहुत ही विनम्र पेश आए। बातों ही बातों में मैंने अपने मन की बात भी कह दी। मैंने कहा- सर मेरी भी तमन्ना डायरेक्टर बनने की थी लेकिन संभव नहीं हो पाया। इस पर भंसाली ने कहा- तो अब कौन सी देर हो गई है। आ जाओ मैदान में अगर जूझने की क्षमता है तो। मैंने कहा- देख लीजिए सर मैं आ भी जाऊंगा। भंसाली बोले- आ जाओ यार जब मर्जी।
इंटरव्यू के बाद भंसाली संग सैल्फी नंबर 2 

इंटरव्यू इतने शानदार माहौल में हुआ कि मन बाग-बाग हो गया। भंसाली का व्यवहार तो कमाल का है। वे बहुत ही मंझे हुए व्यक्ति हैं और कोई भी उनसे प्रभावित हुए बिना रह ही नहीं सकता।

ट्रेलर लांच के समय हमारे साथ बातचीत करते रणवीर-दीपिका। 
बाजीराव मस्तानीः इंटरव्यू में दीपिका ही बोले जा रही थी। एक बार तो रणवीर नाराज होकर चुप हो गए और
दीपिका से बोले- आप ही बोलो मेरा हो गया। बाद में वे नार्मल भी हो गए। आप मेरी पुरानी पोस्ट में
दोनों से बातचीत के अंश पढ़ सकते हैं। 





No comments:

Post a Comment