Monday, 7 December 2015

Bajirao Mastani में रणवीर, दीपिका और प्रियंका ही क्यों? (part 2)

मुंबई में इस महान फिल्मकार से हुई बातचीत का दूसरा भाग


‘बाजीराव मस्तानी’ को जहां इस समय देश की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म माना जा रहा है वहीं इसे लेकर तमाम तरह से सवाल भी सबके जहन में उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो ये ही है कि आखिर संजय लीला भंसाली को अपने जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण को कास्ट करने की कैसे सूझी ? कभी इस फिल्म के लिए शाहरुख खान, करीना कपूर, हृतिक रोशन, कैटरीना कैफ जैसे स्टार्स के नाम लिए जा रहे थे। खुद भंसाली ने कहीं कहा था कि वे हृतिक को लेकर काफी गंभीर थे लेकिन इसी बीच ‘जोधा अकबर’ आ गई और शायद संजय को लगा कि हृतिक को लेकर फिर ऐतिहासिक फिल्म बनाना सही नहीं होगा। जब ‘रामलीला’ बनाई तो संजय रणवीर व दीपिका से प्रभावित हो गए और उन्होंने इन दोनों को ही मुख्य कास्ट में लेने का फैसला कर लिया। वैसे कहा ये भी जा रहा है कि चूंकि रीयल लाइफ में भी रणवीर व दीपिका की कैमिस्ट्री रंग जमा रही है इसलिए संजय ने उन्हें कास्ट कर लिया। ‘बाजीराव मस्तानी’ से जुड़े संजय लीला भंसाली के इंटरव्यू का पहला भाग आप पढ़ ही चुके हैं। दूसरे भाग में बात उनकी फिल्म की स्टारकास्ट व दूसरे पहलुओं को लेकर:-

आपने कहा कि ‘रामलीला’ आपकी फेवरेट फिल्म है। क्या इसी वजह से आपने रणवीर व दीपिका को ‘बाजीराव मस्तानी’ में भी कास्ट किया ? 
काफी हद तक ये सही है। दोनों के साथ काम करते हुए मैंने महसूस किया कि काम के प्रति दोनों की लगन बहुत ही जबर्दस्त है। जो मैं चाहता हूं अपने कलाकारों से वो ये दोनों बहुत ही खूबसूरत तरीके से स्क्रीन पर उतार रहे थे। ‘रामलीला’ में कुछ ऐसा था जो केवल इन दोनों की वजह से ही संभव हो पाया। कुछ सीन इस तरह से डूबकर किए जाने वाले थे कि दोनों ने उन्हें बहुत ही सुंदरता से निभाया। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि अब ‘बाजीराव मस्तानी’ बनाने का समय आ गया है।  

रणवीर सिंह हमेशा मजाकिया व खिलंदड़े किस्म के किरदार निभाते रहे हैं, आपको बाजीराव जैसे योद्धा की कहानी में वे कैसे फिट लग गए? 
हां ये बात सही है कि रणवीर ने अब तक सीरियस रोल कम किए हैं। मुझे भी ऐसा ही लगता था लेकिन ‘रामलीला’ में जो डेडिकेशन उन्होंने दिखाया उसने मेरी धारणा को बदल दिया। रणवीर मुझे ऐसे कलाकार लगते हैं जिन्हें निर्देशक कच्ची मिट्टी की तरह किसी भी रंग रूप में ढाल सकता है। हो सकता है दूसरे डायरेक्टर उनका यूज नहीं कर पाए लेकिन मैंने रामलीला के दौरान ही ये महसूस कर लिया कि उनके भीतर एक अलग ही लेवल की एनर्जी है जो मैंने बहुत ही कम कलाकारों में देखी है।

और दीपिका पादुकोण ?
 पहली बात तो वही जो पहले कही है। दोनों कलाकारों की कैमिस्ट्री। जब टीम अच्छा काम कर रही है तो उसे बदलने में क्या फायदा? वैसे भी पिछले कुछ सालों में दीपिका ने जिस तरह से खुद को ढाला है वो कमाल का है। ‘पीकू’ में देखिये वो किस तरह से आफबीट रोल कर रही थी। और दूसरी फिल्मों में भी दीपिका ने शानदार काम किया है। ‘रामलीला’ के कुछ सीन बहुत ही मुश्किल थे। ‘बाजीराव मस्तानी’ में भी आपको कुछ बहुत ही टफ सीन देखने को मिलेंगे, उन्हें दीपिका ने पूरी शिद्दत से निभाया है। वो इस समय इंडस्ट्री में मौजूद सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं। मस्तानी के रोल में उन्हें देखने के बाद आप ये नहीं कह सकेंगे कि इस रोल को कोई दूसरी एक्ट्रेस किस तरह से निभाती या फिर अच्छा करती।

‘बाजीराव मस्तानी’ में कठिन रोल करने को लेकर मैंने दीपिका से एक सवाल मुंबई में ट्रेलर लांच के मौके पर भी पूछा था। उसके जवाब में दीपिका ने कहा था "संजय सर की फिल्म में कुछ भी आसान नहीं होता। आपको अपना 200 परसेंट देना होता है। आप कल्पना नहीं करेंगे लेकिन एक छोटे से छोटे सीन पर भी वे कितना फोकस करते हैं। सीन शूट हो जाता है और फिर उसे स्क्रीन पर देखने लगते हैं। बार-बार रिपीट करके देखते हैं। कुछ खाते रहते हैं और चुपचाप सीन को रिपीट करके देखते रहते हैं। फिर अचानक ही उन्हें सीन में कुछ कमी नजर आ जाती है और वे कहते हैं री शूट। मैं उनसे कहती थी कि प्लीज नो सर, री शूट नहीं। ये मेरा बेस्ट था, मैंने बहुत मेहनत की थी। जानते हैं उनका जवाब क्या आता था। ‘तुमने तो सही किया है लेकिन पीछे खड़ी एक्स्ट्रा ने वो स्टेप गलत कर दिया।‘ यानी आपको दोबारा करना ही होगा। आपको बताऊं इस फिल्म में मैंने बड़ी सी एक नथनी पहनी है। जबकि मेरी नाक में छेद नहीं है। उसे जबर्दस्ती कसकर लगाना पड़ता था। कई बार तो ऐसा होता था कि मैं शाट देने के लिए घूमती थी तो फटाक से नथनी खुल जाती थी। कई बार तो इसी वजह से सीन बार-बार शूट करने पड़े। मुश्किल तो होती है लेकिन वे आपके अंदर से आपका बेस्ट निकाल लेते हैं। मैं लकी हूं कि मुझे उनकी फिल्म में मस्तानी का किरदार निभाने का मौका मिला। ये मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन रोल्स में से एक है।"

 
और आपकी फेवरेट प्रियंका चोपड़ा? 
आपने सही कहा, प्रियंका मेरी फेवरेट हैं लेकिन मैंने उनके साथ अभी तक कोई फिल्म नहीं की थी। ‘मैरीकाम’ मेरी प्रोडक्शन में बनी थी लेकिन उसे डायरेक्ट ओमांग कुमार ने किया था। हां ‘रामलीला’ में प्रियंका ने एक गाना (राम चाहे लीला) किया था। उस गाने की शूटिंग के समय ही मेरे दिमाग में काशीबाई के रोल के लिए प्रियंका का नाम आया था। हालांकि काशीबाई फिल्म का मुख्य किरदार नहीं है लेकिन फिर भी ये एक स्ट्रांग रोल था। मैं लकी हूं कि मैंने प्रियंका को ये रोल आफर की और उन्होंने तुरंत हां कर दी। आप पाएंगे कि प्रियंका इस फिल्म में आपको सरप्राइज तरीके से चौंका देंगी। वे गजब की एक्टर हें।

 
[ पिछले दिनों प्रियंका चोपड़ा अपने अंग्रेजी टीवी सीरियल क्वांटिकों के लिए काफी बिजी रही हैं। वे लगातार यूएस और कनाडा में हैं। मल्हारी गीत की लांचिंग के लिए पीसी इंडिया आई और वो भी एक दिन के लिए। गीत की लांचिंग भोपाल में हुई और वहीं मेरे दोस्त आरजे आलोक (ओये एफएम मुंबई) ने पीसी से इंटरव्यू किया। एक सवाल मैंने भी आलोक को सुझाया था (प्रियंका के लिए)। मैंने पूछा था कि आपने सैकेंड लीड रोल होने के बावजूद बाजीराव मस्तानी किस वजह से साइन की- सब्जेक्ट की वजह से या संजय लीला भंसाली की वजह से? इसके जवाब में पीसी का कहना था कि केवल संजय लीला भंसाली की वजह से। आप समझ सकते हैं कि पीसी को संजय पर कितना विश्वास था और उन्होंने ये फिल्म साइन कर ली। ] 

 
आपकी अगली फिल्म कौन सी होगी और क्या फिर इन कलाकारों को आप रिपीट करेंगे?
अभी तो सारी फोकस बाजीराव मस्तानी की रिलीजी पर है। दिमाग में हर समय आइडिया तो चलते ही रहते हैं। रोजाना एक नया आइडिया आता है दिमाग में। पता नहीं कौन सा क्लिक कर जाए। इतना कह सकता हूं कि ये तीनों ही शानदार कलाकार हैं और मैं ही नहीं हर डायरेक्टर इनके साथ बार-बार काम करना चाहेगा।
संजय लीला भंसाली के साथ उनके आफिस में ली एक सैल्फी।

(संजय लीला भंसाली के दिलचस्प आफिस व उनसे हुई मुलाकात से जुड़े संस्मरण अगली पोस्ट में)

No comments:

Post a Comment