शुरू से आखिर तक तापसी पन्नू की फिल्म
Rating - 3*
किसी भी फिल्म को देखने से पहले उसके बारे में कोई अवधारणा नहीं पाल लेनी चाहिए। आजकल इंटरनेट पर हर फिल्म के बारे में इतना सब कुछ प्रसारित किया जाता है कि कई बार तो ऐसा लगने लगता है कि यह फिल्म बहुत ही गजब की होगी या फिर कभी-कभी ये लगता है कि यार ये फिल्म देखी जाए या नहीं? 'मनमर्जियां' के बारे में पहले से ही लग रहा था कि यार इस फिल्म में कुछ गजब का होने जा रहा है। इसे जरूर देखना पड़ेगा। और हो भी क्यों नहीं, अनुराग कश्यप ने पहली बार अपने मार्का स्टाइल से हटकर फिल्म जो बनाई है। पहली बार उन्हें रोमांस और म्यूजिक की कद्र समझ में आई है। नहीं तो अब तक वे प्यार को केवल 'वाइल्ड सैक्स' से ही जज करते आए हैं।
इस फिल्म से अनुराग कश्यप ने अपने आप को बदलने की भरपूर कोशिश की है, पर निर्देशक के अंदर जो फिल्मकार बसा होता है तो बार-बार बाहर आ ही जाता है। इस फिल्म में उन्होंने प्यार के दोनों पहलू ही दिखाने की कोशिश की है। पर बार-बार वाइल्ड सैक्स भारी पड़ता नजर आता है, आदत जो ठहरी अनुराग की। लेकिन चूंकि इस बार अनुराग ने अपने आप को बदलने की ठान ली थी इसलिए उन्हें सच्चे व संस्कारी प्यार की जीत दिखानी पड़ी। यहीं फिल्म मार खा गई। फिल्म में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन संस्कारी प्यार को जिताने के चक्कर में एक तो फिल्म को दूसरा हाफ बोझिल हो गया और फिल्म का क्लाईमैक्स ज्यादा स्वीकार्य नहीं बन पाया।
कहानी बहुत ही साधारण सी है। रुमी (तापसी) और विक्की (विक्की कौशल) अमृतसर के दो लव बर्ड्स हैं जो सारी दुनिया से बेफिक्र अपनी मनमर्जियां करते रहते हैं। उनके लिए सैक्स प्यार का ही दूसरी रूप है। इसलिए जब भी मन करता है प्यार करने लगते हैं। रुमी शादी की कहती है तो वह हिम्मत नहीं जुटा पाता। लंदन रिटर्न बैंकर रॉबी (अभिषेक बच्चन) अमृतसर में शादी करने के लिए आता है। कई लड़कियों की तस्वीरें उसे दिखाई जाती हैं लेकिन उसका दिल तो हॉकी खेलने वाली बिंदास रुमी पर अटक जाता है। हालांकि उसे पता चल जाता है कि रुमी और विक्की का क्या चक्कर है, लेकिन फिर भी वह जिद पर अड़ जाता है। उसका तर्क था कि मैं रुमी के लिए खुद को विकल्प क्यों नहीं बना सकता? रुमी और विक्की की आपस की तकरार के चलते रुमी भी शादी के लिए हां कह देती है। रॉबी व रुमी शादी कर कश्मीर हनीमून पर भी जाते हैं, पर दोनों के बीच प्यार नहीं हो पाता। रॉबी रुमी से कहता है कि वो विक्की से शादी कर ले। विक्की भी सुधरने का वायदा करता है और आस्ट्रेलिया चला जाता है कोई काम धंधा करने। अदालत में तलाक की औपचारिकता पूरी करने के लिए रॉबी व रुमी जाते हैं और साइन करके बाहर आते हैं, और सड़क पर चलते-चलते ही बातें करने लगते हैं। दोनों को अहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं। रुमी रॉबी को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजती है और दोनों फिर से एक हो जाते हैं।फिल्म का अंत सही है या गलत इसका फैसला आप फिल्म देखने के बाद ही करें। एक बार तो देखने लायक है ही यह फिल्म। अगर दूसरा हाफ भी पहले जैसा होता तो मजा आ जाता।
अनुराग कश्यप ने खुद को बदलने की असफल कोशिश की है। इतिहास गवाह है कि फिल्मकारों ने जब-जब अपने स्टाइल को बदलने की कोशिश की है उनसे ऐतिहासिक भूलें हुई हैं। यश चोपड़ा भी 'दीवार' व 'त्रिशूल' बनाने के बाद जब 'सिलसिला' व 'फासले' बनाने गए थे तो गच्चा खा गए थे। ये आसान नहीं होता। अनुराग कश्यप को बिहार व यूपी की बढिय़ा जानकारी जरूर है लेकिन पंजाब को वे ज्यादा नहीं जान पाए। केवल शराब, सिगरेट, डीजे और सैक्स ही पंजाब नहीं है। उनकी नजर में अमृतसर की लड़कियों को जब तक दिन में दो बार 'फ्यार' (प्यार में एफ शब्द जोड़ दें तो) न किया जाए तो उनकी आग ठंडी नहीं होती। फिल्म की शूटिंग उन्होंने वास्तविक लोकेशंस पर की है इसलिए जान बच गई है। शुरू के आधा घंटा तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई पंजाबी फिल्म देख रहे हैं। अभिषेक बच्चन के आने के बाद ही फिल्म में बालीवुड फिल्म का लुक आता है। हर मौके पर फिल्म में गीत हैं। सारे पंजाबी हैं, जो सिनेमा में सुनने में अच्छे लगते हैं लेकिन कोई भी सुपर हिट हो जाए इतना दम नहीं है। हां अमित त्रिवेदी ने बैकग्राउंड संगीत में झंडे गाड़ दिए हैं।
सही बताऊं तो यह फिल्म तापसी पन्नू की फिल्म है। शुरू से आखिर तक तापसी ही छाई रहती हैं। उन्होंने रुमी के किरदार को भरपूर जिया है। उन्होंने अपने निजी प्रयास से इस किरदार में आग भर दी है। बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग बोलने का अंदाज, कपड़े पहनना और यहां तक शादी शुदा दिखने में भी उन्होंने अपने तेवर अलग ही रखे हैं। ये उनके कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है। इसके बाद उन्हें इसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए कि उन पर कहीं अलग हटके रोल करने का ठप्पा तो नहीं लग गया है? मैं बता दूं, वे पूरी तरह से बॉलीवुड में आ चुकी हैं और छा जाने की तैयारी में हैं। वैसे भी फिल्म में अनुराग कश्यप रुमी के किरदार के साथ प्यार में नजर आते हैं। जब भी तापसी पर्दे पर आती हैं तो अनुराग का निर्देशन टॉप फॉर्म में होता है। तापसी के लिए एक ही शब्द कहूंगा-लाजवाब।
अभिषेक बच्चन को कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में कहते सुना था कि एक लंबा ब्रेक लेने के बाद वे एक ऐसी फिल्म करना चाहते थे जो कुछ नयापन आफर करे। और इसलिए उन्होंने अनुराग से दूरियां होने के बावजूद इस फिल्म को किया है। पर उनकी सोच गलत है। ऐसा रोल वे बरसों पहले 'मैं प्रेम की दीवानी हूं' में कर चुके हैं। एक सभ्य व शालीन युवक का किरदार उन्होंने बढिय़ा तरीके निभाया है लेकिन इस फिल्म से उनके कैरियर को नया बूस्ट मिल जाएगा इसका मुझे संदेह है।
विक्की कौशल तो सफलता के घोड़े पर सवार हैं। एक के बाद एक अच्छे रोल उन्हें मिल रहे हैं। कलाकार वे बढिय़ा हैं ही। जो भी किरदार निभाते हैं उसमें घुस जाते हैं। यहां भी उन्होंने वैसा ही किया है। पंजाब के टिपिकल टैटू शैटू वाले डीजे ब्वॉय के रोल में वे छाए रहते हैं। बाकी कलाकारों ने भी अपने काम को ठीक-ठाक तरीके से किया है।
फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट मिला है लेकिन अनुराग ने इसे ए सर्टिफिकेट दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बस किनारे पर रुक गए। फैमिली फिल्म तो नहीं कहूंगा हां युवाओं को एक बार जरूर यह फिल्म देखनी चाहिए और सीख लेनी चाहिए कि हमें अपने जीवन में कभी न कभी तो सीरियस होना ही होता है।
- हर्ष कुमार सिंह
"शुरू से आखिर तक तापसी ही छाई रहती हैं। उन्होंने रुमी के किरदार को भरपूर जिया है। उन्होंने अपने निजी प्रयास से इस किरदार में आग भर दी है। बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग बोलने का अंदाज, कपड़े पहनना और यहां तक शादी शुदा दिखने में भी उन्होंने अपने तेवर बदलने नहीं दिए हैं। ये उनके कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है।"
किसी भी फिल्म को देखने से पहले उसके बारे में कोई अवधारणा नहीं पाल लेनी चाहिए। आजकल इंटरनेट पर हर फिल्म के बारे में इतना सब कुछ प्रसारित किया जाता है कि कई बार तो ऐसा लगने लगता है कि यह फिल्म बहुत ही गजब की होगी या फिर कभी-कभी ये लगता है कि यार ये फिल्म देखी जाए या नहीं? 'मनमर्जियां' के बारे में पहले से ही लग रहा था कि यार इस फिल्म में कुछ गजब का होने जा रहा है। इसे जरूर देखना पड़ेगा। और हो भी क्यों नहीं, अनुराग कश्यप ने पहली बार अपने मार्का स्टाइल से हटकर फिल्म जो बनाई है। पहली बार उन्हें रोमांस और म्यूजिक की कद्र समझ में आई है। नहीं तो अब तक वे प्यार को केवल 'वाइल्ड सैक्स' से ही जज करते आए हैं।
इस फिल्म से अनुराग कश्यप ने अपने आप को बदलने की भरपूर कोशिश की है, पर निर्देशक के अंदर जो फिल्मकार बसा होता है तो बार-बार बाहर आ ही जाता है। इस फिल्म में उन्होंने प्यार के दोनों पहलू ही दिखाने की कोशिश की है। पर बार-बार वाइल्ड सैक्स भारी पड़ता नजर आता है, आदत जो ठहरी अनुराग की। लेकिन चूंकि इस बार अनुराग ने अपने आप को बदलने की ठान ली थी इसलिए उन्हें सच्चे व संस्कारी प्यार की जीत दिखानी पड़ी। यहीं फिल्म मार खा गई। फिल्म में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन संस्कारी प्यार को जिताने के चक्कर में एक तो फिल्म को दूसरा हाफ बोझिल हो गया और फिल्म का क्लाईमैक्स ज्यादा स्वीकार्य नहीं बन पाया।
अनुराग कश्यप ने खुद को बदलने की असफल कोशिश की है। इतिहास गवाह है कि फिल्मकारों ने जब-जब अपने स्टाइल को बदलने की कोशिश की है उनसे ऐतिहासिक भूलें हुई हैं। यश चोपड़ा भी 'दीवार' व 'त्रिशूल' बनाने के बाद जब 'सिलसिला' व 'फासले' बनाने गए थे तो गच्चा खा गए थे। ये आसान नहीं होता। अनुराग कश्यप को बिहार व यूपी की बढिय़ा जानकारी जरूर है लेकिन पंजाब को वे ज्यादा नहीं जान पाए। केवल शराब, सिगरेट, डीजे और सैक्स ही पंजाब नहीं है। उनकी नजर में अमृतसर की लड़कियों को जब तक दिन में दो बार 'फ्यार' (प्यार में एफ शब्द जोड़ दें तो) न किया जाए तो उनकी आग ठंडी नहीं होती। फिल्म की शूटिंग उन्होंने वास्तविक लोकेशंस पर की है इसलिए जान बच गई है। शुरू के आधा घंटा तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई पंजाबी फिल्म देख रहे हैं। अभिषेक बच्चन के आने के बाद ही फिल्म में बालीवुड फिल्म का लुक आता है। हर मौके पर फिल्म में गीत हैं। सारे पंजाबी हैं, जो सिनेमा में सुनने में अच्छे लगते हैं लेकिन कोई भी सुपर हिट हो जाए इतना दम नहीं है। हां अमित त्रिवेदी ने बैकग्राउंड संगीत में झंडे गाड़ दिए हैं।
सही बताऊं तो यह फिल्म तापसी पन्नू की फिल्म है। शुरू से आखिर तक तापसी ही छाई रहती हैं। उन्होंने रुमी के किरदार को भरपूर जिया है। उन्होंने अपने निजी प्रयास से इस किरदार में आग भर दी है। बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग बोलने का अंदाज, कपड़े पहनना और यहां तक शादी शुदा दिखने में भी उन्होंने अपने तेवर अलग ही रखे हैं। ये उनके कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है। इसके बाद उन्हें इसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए कि उन पर कहीं अलग हटके रोल करने का ठप्पा तो नहीं लग गया है? मैं बता दूं, वे पूरी तरह से बॉलीवुड में आ चुकी हैं और छा जाने की तैयारी में हैं। वैसे भी फिल्म में अनुराग कश्यप रुमी के किरदार के साथ प्यार में नजर आते हैं। जब भी तापसी पर्दे पर आती हैं तो अनुराग का निर्देशन टॉप फॉर्म में होता है। तापसी के लिए एक ही शब्द कहूंगा-लाजवाब।
अभिषेक बच्चन को कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में कहते सुना था कि एक लंबा ब्रेक लेने के बाद वे एक ऐसी फिल्म करना चाहते थे जो कुछ नयापन आफर करे। और इसलिए उन्होंने अनुराग से दूरियां होने के बावजूद इस फिल्म को किया है। पर उनकी सोच गलत है। ऐसा रोल वे बरसों पहले 'मैं प्रेम की दीवानी हूं' में कर चुके हैं। एक सभ्य व शालीन युवक का किरदार उन्होंने बढिय़ा तरीके निभाया है लेकिन इस फिल्म से उनके कैरियर को नया बूस्ट मिल जाएगा इसका मुझे संदेह है।
विक्की कौशल तो सफलता के घोड़े पर सवार हैं। एक के बाद एक अच्छे रोल उन्हें मिल रहे हैं। कलाकार वे बढिय़ा हैं ही। जो भी किरदार निभाते हैं उसमें घुस जाते हैं। यहां भी उन्होंने वैसा ही किया है। पंजाब के टिपिकल टैटू शैटू वाले डीजे ब्वॉय के रोल में वे छाए रहते हैं। बाकी कलाकारों ने भी अपने काम को ठीक-ठाक तरीके से किया है।
फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट मिला है लेकिन अनुराग ने इसे ए सर्टिफिकेट दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बस किनारे पर रुक गए। फैमिली फिल्म तो नहीं कहूंगा हां युवाओं को एक बार जरूर यह फिल्म देखनी चाहिए और सीख लेनी चाहिए कि हमें अपने जीवन में कभी न कभी तो सीरियस होना ही होता है।
- हर्ष कुमार सिंह






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