Friday, 7 July 2017

DEEP REVIEW: MOM ***

कुछ नया नहीं, केवल श्रीदेवी और अपने बच्चों के लिए देखें 

Ratings- 3*

 महिला प्रधान फिल्मों के नाम पर पिछले कुछ साल से दिल्ली का निर्भया कांड या यूं कहें गैंगरेप की घटनाएं पसंदीदा विषय बन गया है। पिछले दो साल में ही इस तरह के थीम को लेकर मातृ, जज्बा, पिंक और मॉम जैसी कई फिल्में बनी हैं। मेरा तो मानना है कि बेगम जान भी इसी सब्जेक्ट को दिमाग में रखकर बनाई गई थी। इन सभी में मां और बेटी की कहानियां हैं। बेटी को तकलीफ में देखकर नायिका के भीतर की मां जाग जाती है और फिर सभी अपने-अपने तरीके से अपनी कहानी को अंजाम तक ले जाती हैं। मॉम भी कुछ अलग नहीं है। मुझे तो आश्चर्य यह हो रहा है कि मॉम व अभी कुछ महीने पहले आई फिल्म मातृ की कहानी में इतनी समानता कैसे है? दोनों में ही नायिका स्कूल टीचर हैं। दोनों में ही पुलिस अंत में हिरोईन को एक के बाद एक हत्याएं करते हुए रंगे हाथ पकडऩे के बाद भी कुछ नहीं कहती। केवल फर्क यह है कि मातृ में मां व बेटी, दोनों रेप का शिकार होती हैं जबकि मॉम में केवल बेटी। अब चूंकि दोनों ही फिल्में एक साथ बन रही थी और हो सकता है कि लेखकों को इस बात की भनक हो गई थी कि दोनों की कहानी एक ही है और इसलिए कुछ फर्क कर दिया गया। मातृ में रवीना टंडन का पति उन्हें ही सारी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराता है जबकि मॉम में श्रीदेवी के पति को उनके सपोर्ट में दिखाया गया है।

मूल कहानी को छोड़ दिया जाए तो मॉम और मातृ में बहुत से बुनियादी फर्क हैं। मॉम एक बड़े स्केल पर बनाई गई फिल्म है। इसमें सब कुछ बड़े पैमाने पर रचा गया है। सपोर्टिंग कास्ट में नवाजुद्दीन सिद्दीकी व अक्षय खन्ना जैसे मंझे हुए कलाकार रखे गए हैं जिनकी वजह से फिल्म में दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहती है। कहानी एक लाइन की है। श्रीदेवी की 18 साल की बेटी से चार लोग गैंगरेप करते हैं और आरोपी सबूतों के अभाव में छूट जाते हैं। सिस्टम से नाराज होकर श्रीदेवी एक जासूस की मदद से आरोपियों से बदला लेती हैं। फिल्म बहुत ही साधारण बन जाती अगर इसमें श्रीदेवी, और ए आर रहमान का बैकग्राउंड म्यूजिक न होता। ए आर रहमान ने बैकग्राउंड संगीत से फिल्म के स्केल को बहुत ऊपर उठा दिया है। कुछ संवाद भी अच्छे हैं। जैसे- भगवान हर जगह नहीं हो सकता इसलिए उसने मां बना दी, गलत और बहुत गलत में से कुछ चुनना हो तो आप क्या करोगे?

श्रीदेवी ने इंग्लिश विंग्लिश के पांच साल बाद यह फिल्म की है लेकिन मेरा मानना है कि यह फिल्म उतनी बेहतर नहीं बन सकी है। न ही इसकी बाक्स आफिस पर सफलता के कोई आसार नजर आते हैं। इस तरह की फिल्में बहुत ही डार्क होने के कारण रिपीट वैल्यू वाली नहीं होतीं। मनोरंजन कम होता है तो लोग फिल्म देखने सपरिवार नहीं जाते। इंग्लिश-विंग्लिश बहुत ही मनोरंजक व पारिवारिक फिल्म थी और उसे आप बार-बार देख सकते हैं। मैसेज देने में सबसे ज्यादा सफल पिंक रही थी जिसमें इस विषय को सबसे ज्यादा खूबसूरती से हैंडल किया गया था।
श्रीदेवी का फैन होने के नाते मैं मॉम में इससे कुछ ज्यादा उम्मीद कर रहा था। जहां तक एक्टिंग का सवाल है तो श्रीदेवी ने जबर्दस्त काम किया है। हाल फिलहाल आई दूसरी महिला प्रधान फिल्मों से यह थोड़ी मजबूत अगर नजर आती है तो इसका पूरा श्रेय श्रीदेवी को ही है। जब अस्पताल में श्रीदेवी पहली बार अपनी बेटी को देखती हैं और फूट-फूटकर रोती हैं तो उनके अभिनय की बुलंदियां नजर आती हैं। यह सबूत मिल जाता है कि उन्हें क्यों इतनी आला दर्जे की अभिनेत्री माना जाता है। इसके अलावा कई और दृश्यों में भी श्रीदेवी अपनी छाप छोड़ती हैं। वैसे लगता है श्रीदेवी कुछ ज्यादा ही डाइटिंग करती हैं। खासतौर से क्लोज अप्स में चेहरे की हड्डियां नजर आती हैं, अगर थोड़ा सा वजन बढ़ा लें तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी। फिल्म में श्रीदेवी की बेटी का रोल निभाने वाली सजल अली व पति बने अदनान सिद्दीकी, दोनों ही पाकिस्तानी कलाकार हैं, और उन्होंने अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है। अदनान को हमने कई पाकिस्तानी टीवी सीरियल्स में देखा है वे शानदार कलाकार हैं। सजल अली बेहद खूबसूरत हैं और एक्टिंग के लक्षण उनमें इस फिल्म में नजर आते हैं। बाप-बेटी के बीच भी कुछ मार्मिक सीन हैं। खासतौर से जब दोनों मोबाइल पर मैसेजिंग के जरिये बात करते हैं तो दर्शकों की आंखें भर आती हैं। ऐसी फिल्में भले ही बाक्स आफिस पर क्रांति नहीं करती लेकिन सबक तो देकर जाती हैं। इसलिए मेरी सलाह है कि आप भी बच्चों के साथ जाकर इस फिल्म को जरूर देखें। कम से कम फिल्म देखने से बच्चों की समझ में तो यह तो आएगा कि मां-बाप की सलाह मानना उनके लिए क्यों जरूरी है और अभिभावक अपने बच्चों के दुश्मन नहीं हैं। इसके अलावा उन लोगों के लिए भी इनमें सबक होता है जिनके बच्चे गलत सोहबत में बिगड़ रहे हैं।

- हर्ष कुमार सिंह

8 comments:

  1. maine ab tak teen review aur padhe hain...apka review ekdam alag tarah ka hai ya yun kahen ki jo chijein log dekhkar kahne ki himmat nahi kar payen aap kah jate hain...bahut sunder ab to film dekhni banti hai...

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  2. बहुत बेहतरीन समिच्छा की है सर आपने ....

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    1. शुक्रिया, आपका शुभ नाम?

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  3. बहुत बेहतरीन समिच्छा की है सर आपने ...

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  4. आपने समीक्षा बहुत खूब की है सर...

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