Sunday, 9 July 2017

एक कंगना ही काफी नहीं है, बालीवुड को और चाहिए

साल भर में न जाने कितने फिल्म पुरस्कार समारोह होते हैं। उनमें तमाम हिंदी फिल्मी गीतों पर कलाकार परफोर्म करते हैं। हिंदी फिल्मों के लिए पुरस्कार भी जीतते हैं लेकिन जैसे ही थैंकिंग स्पीच देने की बात आती है तो सब अंग्रेजी में शुरू हो जाते हैं। सब हिंदी फिल्मों में काम करते हैं लेकिन जब भी मौका आता है तो हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं।
 
 हम लोग भी उन्हीं सितारों को अच्छा व पढ़ा लिखा समझते हैं जो ताबड़तोड़ अंग्रेजी बोलते हैं। गोविंदा या नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसा कोई कलाकार हिंदी में धन्यवाद देता है तो हम कहते हैं- लगता है इसे अंग्रेजी नहीं आती। फिल्में ही क्यों क्रिकेट की दुनिया में भी तो कुछ ऐसा ही है। जो खिलाड़ी अंग्रेजी नहीं बोल पाते उन्हें हम हेय दृष्टि से देखते हैं। शुक्र है वीरेंद्र सहवाग जैसे बल्लेबाजों का जिन्होंने अपनी सारी जिंदगी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए दुनियाभर के गेंदबाजों की पिटाई की और हिंदी का झंडा भी बुलंद रखा। अब हिंदी की कमेंट्री में भी उन्होंने नए आयाम स्थापित किए। बात खेलों की करूं तो अक्सर देखता हूं कि क्रोएशिया, रूस, जर्मनी, उक्रेन, चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों के खिलाड़ी अपने देश की भाषा में ही बोलना पसंद करते हैं। उन्हें जरा भी झिझक नहीं होती।
हिंदी बोलने में हमारे बालीवुड में ही सबसे ज्यादा शर्म महसूस की जाती है। जबकि यह भी सब जानते हैं कि हिंदी फिल्मों की पहुंच देश में सबसे ज्यादा है और अगर अमिताभ बच्चन आज देश के सबसे बड़े महानायक हैं तो इसलिए क्योंकि वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से आते हैं। रजनीकांत तमिल भाषाई होने के कारण सुपर स्टार होते हुए भी देश में वो पहचान नहीं रखते जो उनके समकालीन अमिताभ बच्चन की है। जिक्र अमिताभ बच्चन का चला है तो यह भी लिखना जरूरी है कि हिंदी बोलने में अमिताभ बच्चन को कोई जवाब नहीं। अक्सर कई अभिनेत्रियों को मैंने यह कहते सुना है कि वे बच्चन साहब को केवल इसलिए पसंद करती हैं क्योंकि वे हिंदी बहुत अच्छी बोलते हैं। बेबी डॉल सिंगर कनिका कपूर ने तो उन्हें दुनिया का सबसे सैक्सी मर्द बता दिया था केवल उनकी हिंदी बोलने की अदा की वजह से ही। पर जानते हैं अमिताभ बच्चन को हिंदी बोलने के लिए केवल इसलिए इतना पसंद किया जाता है क्योंकि वे अंग्रेजी भी उतनी दक्षता से बोलते हैं। या यूं कहें कि जिस तरह की अंग्रेजी वे बोलते हैं वो बालीवुड के दूसरे फिल्म स्टार्स के भी बस की बात नहीं है। एकदम इंटरनेशनल क्लास और ग्रामर की दृष्टि से एकदम परफेक्ट।

बालीवुड में हिंदी व अंग्रेजी की लड़ाई को एक नया रूप दिया है क्वीन कंगना रनौत ने। कंगना बालीवुड में अपनी शर्तों पर काम करने वाली हिरोईन के रूप में पहचान बना चुकी हैं। लगभग 10 साल तक संघर्ष करने के बाद कंगना ने अपना जो मुकाम बनाया है उसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। हिमाचल प्रदेश से आई और बालीवुड की सुपर स्टार बन गई। कंगना ने अक्सर हिंदी भाषी होने के कारण अपनी अनदेखी की बात कही। कंगना ने साफ कहा कि बालीवुड में उनसे कुछ लोग केवल इसलिए खुलकर बात नहीं करते थे क्योंकि वे अंग्रेजी नहीं जानती थी। आज वे अंग्रेजी भी बोलती हैं और उन्हें फैशन आईकन तक कहा जाने लगा है।
मेरे इस ब्लॉग के पीछे कंगना रनौत ही एक मुख्य वजह हैं। कंगना ने पिछले दिनों दो टीवी शो में कुछ बातें कहीं और उन्हें लेकर काफी कुछ लिखा गया। काफी विद करण में कंगना ने होस्ट व निर्माता निर्देशक करण जौहर पर भाई भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शो का फोरमेट कुछ ऐसा है जिससे कुछ विवाद हमेशा होते रहे हैं लेकिन इस बार इस बात ने तूल पकड़ लिया। कंगना ने कह दिया कि करण जौहर बालीवुड में भाई भतीजावाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा देते हैं और हमेशा बड़े बालीवुड घरानों के बच्चों को ही अपनी फिल्मों में लेते हैं। हालांकि बाद में कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए भी कहा क्योंकि शो में थोड़ा मिर्च मसाला आ जाएगा लेकिन मामला मजाक तक नहीं रहा गंभीर हो गया। कंगना के आरोप के जवाब में करण जौहर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे क्या करें जब बालीवुड घरानों के बच्चे हैं ही इतने प्रतिभाशाली? अगर बालीवुड में ही अच्छे कलाकार सामने आ रहे हैं तो वे उन्हें क्यों नहीं साइन करें?

करण ने अपने तर्क दिए लेकिन बात यहीं नहीं थमी। कंगना रनौत ने करण के इन तर्कों को खारिज किया। हाल ही में कंगना रनौत नजर आई रिपब्लिक वल्र्ड चैनल पर अनुपम खेर के चैट शो में। इस इंटरव्यू में जब अनुपम खेर ने उनसे करण के साथ हुए विवाद के बारे में पूछा तो कंगना ने खुलकर अपनी बात कही। कंगना ने कहा कि करण की यह बात उन्हें बिल्कुल हजम नहीं हुई कि केवल बालीवुड में ही टैलेंट पैदा हो रहा है। केवल चार घरानों तक ही बालीवुड सीमित नहीं है। कंगना ने जोर देकर कहा कि दरअसल यहां अंग्रेजी में बात करने वालों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है, उन्हें ही सम्मान मिलता है। पर ऐसा नहीं है। उन्होंने अपनी और अनुपम की ओर इशारा करते हुए कहा कि यहां ऐसे भी लोग हैं जो बाहर से आए और अपना स्थान बनाया। अनुपम ने भी उनसे सहमति जताई। करण जौहर के जवाब में कंगना ने बहुत तफ्सील से अपनी बात कही। कंगना का तर्क था कि बालीवुड के बच्चे बचपन से ही फिल्मों के माहौल में आंख खोलते हैं। उन्हें उसी तरह की ट्रेनिंग मिलती है। उन्हें तैयार करने में कई लोग जुटे होते हैं। इसके अलावा जब वे पहली फिल्म के लिए तैयार होते हैं तो उनकी एक फैन आडियंस भी तैयार हो चुकी होती है जो उनके माता-पिता या परिवार की वजह से उन्हें देखने जाती है। जबकि बाहर से आए कलाकारों को सब कुछ जीरो से शुरू करना होता है।

दरअसल बालीवुड में भाई भताजीवाद, हिंदी-अंग्रेजी का भेदभाव पहले भी था और आगे भी बना रहेगा। सवाल यह है कि क्या एक कंगना रनौत से यह फासला खत्म करना संभव होगा? नहीं हमें एक नहीं सैकड़ों कंगना चाहिए ऐसा करने के लिए।

सलाम है कंगना और उनके जज्बे को।
 

हम आपके साथ हैं कंगना। 


- हर्ष कुमार सिंह

 

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