करोड़ों देशवासियों को समर्पित है 'सचिन-ए बिलियन ड्रीम्स' : सचिन तेंदुलकर
दिनांकः 19 मई 2017
स्थानः होटल आईटीसी मौर्य, नई दिल्ली
समयः शाम 6.30 बजे
''कोई भी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर बन सकता है। बस उसे फोकस करना चाहिए अपने वर्तमान पर। अतीत की विफलताओं को भुलाकर नए लक्ष्य निर्धारित करें, मेहनत करें और इसके बाद सफलता आपको खुद फॉलो करेगी।"
ये प्रेरक शब्द हैं महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के नए क्रिकेटरों के लिए।
सचिन अपने जीवन पर बनी फिल्म 'सचिन-ए बिलियन ड्रीम्स' के सिलसिले में 'नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी' से बात कर रहे थे। 26 मई को रिलीज होने जा रही इस फिल्म का निर्देशन जेम्स एरस्कीन ने किया है और संगीत दिया है ए आर रहमान ने। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर और फिल्म के निर्माता रवि भागचंदका ने इस फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प पहलू शेयर किए:-
जो मिला मां- बाप के आशीर्वाद से
सचिन ने बताया कि वे आज जो कुछ भी हैं वह सब कुछ माता-पिता का आशीर्वाद व भगवान की देन है। बचपन से ही घर में ऐसा माहौल मिला कि किसी और चीज के बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ी। घर में हर समय क्रिकेट का ही जिक्र रहता था। बस खेलना और सिर्फ खेलना। घर पर इतना क्रिकेटिंग माहौल रहा कि कभी बैंक अकाउंट की बात नहीं होती थी। बस मां-पिताजी सब यही पूछते थे कि कितने रन बनाए, कितने विकेट लिए? सचिन का कहना है कि उनके घर में सबका एक ही मंत्र था- अप और डाउन की भूल जाओ। पिछले मैच में क्या हुआ इसकी मत सोचा बल्कि अगले मैच में क्या करना है इसकी योजना बनाओ।
अंजलि का योगदान भी अद्भुत
सचिन का 24 साल लंबा क्रिकेट करियर 13 साल की उम्र से ही शुरू हो गया था। सचिन बताते हैं कि 13 साल की उम्र में ही अंडर 15 के नेशनल कैंप के लिए उनका चयन हो गया था और उसके बाद यह सफर रिटायरमेंट मैच पर ही जाकर थमा। सचिन के अनुसार, जहां उनके शुरूआती करियर में माता-पिता व भाई-बहन को योगदान अहम रहा वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते समय उनकी पत्नी अंजलि का योगदान महत्वपूर्ण रहा। अंजलि गोल्ड मैडलिस्ट डॉक्टर हैं और उनका अपना भी करियर था लेकिन मेरे खेल और क्रिकेट के प्रति जुनून को देखते हुए उन्होंने अपने करियर की परवाह नहीं की और घर-परिवार की सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।
जीवन में एक हीरो का होना जरूरी
44 वर्षीय सचिन तेंदुलकर का मानना है कि आप किसी भी फील्ड से हों लेकिन आपके लिए अपना एक हीरो होना जरूरी है। हो सकता है कि आज के बच्चे सचिन तेंदुलकर बनना चाहते हों लेकिन जब वे खेलते थे तो उनके आदर्श महान सुनील गावस्कर व विव रिचर्ड्स हुआ करते थे। गावस्कर की ठोस बल्लेबाजी और विव रिचर्ड्स की आक्रामकता का मिश्रण उन्होंने अपने खेल में लाने की हमेशा कोशिश की। उभरते हुए खिलाडिय़ों के लिए बहुत ही जरूरी टिप्स देते हुए सचिन ने कहा कि विफलता के भय को बिल्कुल दिमाग से बाहर निकाल दें। अगर दिल से क्रिकेट निकल रही है तो खेलो वरना इसका ख्याल दिमाग से निकाल दो।
जीवन की दूसरी इनिंग के भी बनाए हैं लक्ष्य
एक सवाल के जवाब में सचिन ने कहा कि क्रिकेट करियर की इनिंग उनके रिटायरमेंट मैच के साथ ही खत्म गई थी अब वे अपनी दूसरी इनिंग खेल रहे हैं। जिस देश ने उन्हें इतना प्यार व सम्मान दिया है उसके बदले वे भी देश को बहुत कुछ देना चाहते हैं। उन्होंने अपनी फिल्म का पहला शो भी देश के सैनिकों के लिए आयोजित किया है। सचिन बताते हैं कि वे यूनिसेफ से जुड़े हुए हैं। एक गांव भी गोद लिया हुआ है और अब दूसरा लेने की तैयारी है। इसके अलावा स्प्रैडिंग हैप्पीनेस के नाम से एक अभियान से भी वे जुड़ गए हैं। इसका लक्ष्य उन वंचित लोगों की सहायता करना है जो बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी दूर हैं। सचिन का कहना है कि यह दूसरी इनिंग वे आत्म संतुष्टि के लिए खेलना चाहते हैं।
आज की भारतीय टीम की बैंच स्ट्रैंथ कमाल की देश में अगला सचिन कौन हो सकता है, इस सवाल के जवाब में सचिन का कहना था कि भारतीय क्रिकेट टीम इस समय एक से एक खिलाडिय़ों से भरी पड़ी है। अगर मैदान में खेल रही एकादश मजबूत है तो बाहर बैंच पर बैठे खिलाड़ी भी कमजोर नहीं हैं। किसी भी खिलाड़ी को चोट लगती है तो उसकी जगह लेने के लिए एक से एक क्रिकेटर बाहर तैयार बैठे हैं। उन्होंने जून में चैंपिंयस ट्राफी के लिए जा रही टीम को बहुत ही संतुलित भी बताया।
असली वीडियो हैं फिल्म का हिस्सा
सचिन ने बताया कि इस फिल्म में उनके जीवन के कुछ असली वीडियो भी शामिल किए गए हैं जिन्हें उन्होंने अपने परिवार के लोगों के साथ सलाह मशविरा करने के बाद चुना है। सचिन ने कहा कि उनके जीवन की तीन टीमें रही हैं। एक घर पर, दूसरी ड्रैसिंग रूम में और तीसरी लाखों-करोड़ो वो लोग जो उन्हें चाहते व प्यार करते हैं। यह फिल्म उन्हीं को वे समर्पित करना चाहते हैं।
'पंजाब केसरी' के लिए पंजाब का किस्सा
कई गंभीर मुद्दों पर बेबाकी व दिल से जवाब देने के बीच सचिन तेंदुलकर ने एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा कि 'पंजाब केसरी' से बात कर रहा हूं तो किस्सा भी पंजाब का ही सुनाता हूं। सचिन ने बताया कि 1994 में हम लोग पंजाब में खेल रहे थे तो हरभजन सिंह(भज्जी) वहां भारतीय टीम के लिए नेट्स पर गेंदबाजी करने के लिए आए हुए थे। वे कोई भी शाट मारते तो कुछ ही देर में भज्जी उनके सामने आकर खड़े हो जाते थे। मैं पूछता था कि क्या बात है तो भज्जी पूछते थे कि आपने ही तो बुलाया है। दरअसल सचिन को बार-बार अपना हेलमेट ठीक करने के लिए गर्दन ऊपर नीचे हिलाने की आदत थी और वहां फील्ड में मौजूद भज्जी को लग रहा था कि वे शायद उन्हें बुला रहे हैं।
(यह इंटरव्यू पंजाब केसरी जालंधर, नवोदय टाइम्स नई दिल्ली, जगबानी (पंजाबी) व हिंद समाचार (उर्दू) के 21 मई 2017 के अंकों में छपा।)
दिनांकः 19 मई 2017
स्थानः होटल आईटीसी मौर्य, नई दिल्ली
समयः शाम 6.30 बजे
''कोई भी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर बन सकता है। बस उसे फोकस करना चाहिए अपने वर्तमान पर। अतीत की विफलताओं को भुलाकर नए लक्ष्य निर्धारित करें, मेहनत करें और इसके बाद सफलता आपको खुद फॉलो करेगी।"
ये प्रेरक शब्द हैं महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के नए क्रिकेटरों के लिए।
सचिन अपने जीवन पर बनी फिल्म 'सचिन-ए बिलियन ड्रीम्स' के सिलसिले में 'नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी' से बात कर रहे थे। 26 मई को रिलीज होने जा रही इस फिल्म का निर्देशन जेम्स एरस्कीन ने किया है और संगीत दिया है ए आर रहमान ने। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर और फिल्म के निर्माता रवि भागचंदका ने इस फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प पहलू शेयर किए:-
जो मिला मां- बाप के आशीर्वाद से
सचिन ने बताया कि वे आज जो कुछ भी हैं वह सब कुछ माता-पिता का आशीर्वाद व भगवान की देन है। बचपन से ही घर में ऐसा माहौल मिला कि किसी और चीज के बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ी। घर में हर समय क्रिकेट का ही जिक्र रहता था। बस खेलना और सिर्फ खेलना। घर पर इतना क्रिकेटिंग माहौल रहा कि कभी बैंक अकाउंट की बात नहीं होती थी। बस मां-पिताजी सब यही पूछते थे कि कितने रन बनाए, कितने विकेट लिए? सचिन का कहना है कि उनके घर में सबका एक ही मंत्र था- अप और डाउन की भूल जाओ। पिछले मैच में क्या हुआ इसकी मत सोचा बल्कि अगले मैच में क्या करना है इसकी योजना बनाओ।
अंजलि का योगदान भी अद्भुत
सचिन का 24 साल लंबा क्रिकेट करियर 13 साल की उम्र से ही शुरू हो गया था। सचिन बताते हैं कि 13 साल की उम्र में ही अंडर 15 के नेशनल कैंप के लिए उनका चयन हो गया था और उसके बाद यह सफर रिटायरमेंट मैच पर ही जाकर थमा। सचिन के अनुसार, जहां उनके शुरूआती करियर में माता-पिता व भाई-बहन को योगदान अहम रहा वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते समय उनकी पत्नी अंजलि का योगदान महत्वपूर्ण रहा। अंजलि गोल्ड मैडलिस्ट डॉक्टर हैं और उनका अपना भी करियर था लेकिन मेरे खेल और क्रिकेट के प्रति जुनून को देखते हुए उन्होंने अपने करियर की परवाह नहीं की और घर-परिवार की सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।
जीवन में एक हीरो का होना जरूरी
44 वर्षीय सचिन तेंदुलकर का मानना है कि आप किसी भी फील्ड से हों लेकिन आपके लिए अपना एक हीरो होना जरूरी है। हो सकता है कि आज के बच्चे सचिन तेंदुलकर बनना चाहते हों लेकिन जब वे खेलते थे तो उनके आदर्श महान सुनील गावस्कर व विव रिचर्ड्स हुआ करते थे। गावस्कर की ठोस बल्लेबाजी और विव रिचर्ड्स की आक्रामकता का मिश्रण उन्होंने अपने खेल में लाने की हमेशा कोशिश की। उभरते हुए खिलाडिय़ों के लिए बहुत ही जरूरी टिप्स देते हुए सचिन ने कहा कि विफलता के भय को बिल्कुल दिमाग से बाहर निकाल दें। अगर दिल से क्रिकेट निकल रही है तो खेलो वरना इसका ख्याल दिमाग से निकाल दो।
जीवन की दूसरी इनिंग के भी बनाए हैं लक्ष्य
एक सवाल के जवाब में सचिन ने कहा कि क्रिकेट करियर की इनिंग उनके रिटायरमेंट मैच के साथ ही खत्म गई थी अब वे अपनी दूसरी इनिंग खेल रहे हैं। जिस देश ने उन्हें इतना प्यार व सम्मान दिया है उसके बदले वे भी देश को बहुत कुछ देना चाहते हैं। उन्होंने अपनी फिल्म का पहला शो भी देश के सैनिकों के लिए आयोजित किया है। सचिन बताते हैं कि वे यूनिसेफ से जुड़े हुए हैं। एक गांव भी गोद लिया हुआ है और अब दूसरा लेने की तैयारी है। इसके अलावा स्प्रैडिंग हैप्पीनेस के नाम से एक अभियान से भी वे जुड़ गए हैं। इसका लक्ष्य उन वंचित लोगों की सहायता करना है जो बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी दूर हैं। सचिन का कहना है कि यह दूसरी इनिंग वे आत्म संतुष्टि के लिए खेलना चाहते हैं।
आज की भारतीय टीम की बैंच स्ट्रैंथ कमाल की देश में अगला सचिन कौन हो सकता है, इस सवाल के जवाब में सचिन का कहना था कि भारतीय क्रिकेट टीम इस समय एक से एक खिलाडिय़ों से भरी पड़ी है। अगर मैदान में खेल रही एकादश मजबूत है तो बाहर बैंच पर बैठे खिलाड़ी भी कमजोर नहीं हैं। किसी भी खिलाड़ी को चोट लगती है तो उसकी जगह लेने के लिए एक से एक क्रिकेटर बाहर तैयार बैठे हैं। उन्होंने जून में चैंपिंयस ट्राफी के लिए जा रही टीम को बहुत ही संतुलित भी बताया।
असली वीडियो हैं फिल्म का हिस्सा
सचिन ने बताया कि इस फिल्म में उनके जीवन के कुछ असली वीडियो भी शामिल किए गए हैं जिन्हें उन्होंने अपने परिवार के लोगों के साथ सलाह मशविरा करने के बाद चुना है। सचिन ने कहा कि उनके जीवन की तीन टीमें रही हैं। एक घर पर, दूसरी ड्रैसिंग रूम में और तीसरी लाखों-करोड़ो वो लोग जो उन्हें चाहते व प्यार करते हैं। यह फिल्म उन्हीं को वे समर्पित करना चाहते हैं।
'पंजाब केसरी' के लिए पंजाब का किस्सा
कई गंभीर मुद्दों पर बेबाकी व दिल से जवाब देने के बीच सचिन तेंदुलकर ने एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा कि 'पंजाब केसरी' से बात कर रहा हूं तो किस्सा भी पंजाब का ही सुनाता हूं। सचिन ने बताया कि 1994 में हम लोग पंजाब में खेल रहे थे तो हरभजन सिंह(भज्जी) वहां भारतीय टीम के लिए नेट्स पर गेंदबाजी करने के लिए आए हुए थे। वे कोई भी शाट मारते तो कुछ ही देर में भज्जी उनके सामने आकर खड़े हो जाते थे। मैं पूछता था कि क्या बात है तो भज्जी पूछते थे कि आपने ही तो बुलाया है। दरअसल सचिन को बार-बार अपना हेलमेट ठीक करने के लिए गर्दन ऊपर नीचे हिलाने की आदत थी और वहां फील्ड में मौजूद भज्जी को लग रहा था कि वे शायद उन्हें बुला रहे हैं।
(यह इंटरव्यू पंजाब केसरी जालंधर, नवोदय टाइम्स नई दिल्ली, जगबानी (पंजाबी) व हिंद समाचार (उर्दू) के 21 मई 2017 के अंकों में छपा।)
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