Friday, 11 January 2019

DEEP REVIEW : The Accidental Prime Minister

अनुपम खेर की लाइफ टाइम अदाकारी, बेहतरीन फिल्म
अनुपम खेर व अक्षय खन्ना की यह फिल्म देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय हमारे सामने लाती है। फिल्म पूर्व पत्रकार व ब्यूरोक्रेट संजय बारू की किताब पर बनी है और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के राजनीतिक जीवन, खासतौर से बतौर पीएम, का शानदार दस्तावेज हमारे सामने रखती है। फिल्म को देखने के बाद आपके मन में मनमोहन सिंह के प्रति आदर का भाव जाग जाएगा। हालांकि कुछ पात्रों की चयन सही नहीं किया गया है लेकिन फिल्म अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है। खासतौर से फिल्म की शुरूआत व अंत बहुत ही अच्छा है। समयावधि भी कम है। इसलिए स्टोरी कसी हुई नजर आती है और संपादन भी चुस्त है।

Rating 4*

विस्तार से समीक्षा के लिए #HarshKiBaat के यू ट्यूब चैनल पर जाएंः-




- हर्ष कुमार सिंह


Friday, 28 December 2018

DEEP REVIEW : Simmba

रणवीर सिंह के फैंस को यह फिल्म निराश नहीं करेगी। पूरी तरह से मसाला फिल्म है। कहानी 80-90 के दशक की मनमोहन देसाई की फिल्मों की तरह से है और उसकी ट्रीटमेंट रोहित शेट्टी की सिंघम स्टाइल की है।


'बाजीराव मस्तानी' व 'पदमावत' की शानदार सफलताओं के बाद रणवीर सिंह जिस स्टारडम पर पहुंच गए हैं वहां रणवीर सिंह की इस तरह की फिल्म उनके फैंस को तो तृप्त कर देगी लेकिन अभिनेता के रूप में यह फिल्म उन्हें ज्यादा संतुष्टि नहीं देगी। फिल्म में उन्होंने शानदार अभिनय किया है और पूरी तरह से जान झोंक दी है, इसके बाद भी रणवीर सिंह को 'सिम्बा' अपनी यादगार फिल्मों में नहीं शुमार करना चाहेंगे।

फिल्म 'सिम्बा' का विस्तृत रीव्यू यहां देखिए- 




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- हर्ष कुमार सिंह

Friday, 21 December 2018

DEEP REVIEW : Zero

शाहरुख खान की यह फिल्म उनके अपने मन की फिल्म है। यहां शाहरुख ने खुद के भीतर छिपे कलाकार को संतुष्ट करने की कोशिश की है। इसमें वे सुपर स्टार के ग्लैमर से बाहर निकलकर एक गली के किरदार को निभाते नजर आए हैं। जो बौना है और बड़ी बड़ी बातें करने के अलावा कुछ नहीं करता। उसकी जिंदगी में न कोई मकसद है न कोई उम्मीद। फिल्म अभिनेत्री से मिलने का सपना ही देखता रहता है।
इस फिल्म में शाहरुख ने आनंद एल राय के साथ टीम बनाई है जो बड़े सितारों के साथ कम ही काम करते हैं। शाहरुख ने उन्हें राजी कर लिया यह बड़ी बात है और इसके बाद राय ने किंग खान को किंग साइज रोल देने के बजाय उनके लिए बौना किरदार गढ़ दिया।

फिल्म के बार में विस्तार से मेरा आकलन देखने के लिए क्लिक करें नीचे दिया लिंक-


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- हर्ष कुमार सिंह 

 

Monday, 3 December 2018

DEEP PreVIEW : Simmba

विवादित व चर्चित 'पदमावत' के बाद रणवीर की यह पहली रिलीज होगी। लगभग एक साल के अंतराल के बाद रणवीर सिंह की कोई फिल्म आ रही है। 'पदमावत' में उनके काम को सराहा गया था और वह फिल्म हिट रही थी। 'पदमावत' से पहले रणवीर को 'बेफिक्रे' ने झटका दिया था लेकिन खिलजी के रोल को शानदार तरीके से निभाकर रणवीर ने भरपाई कर ली थी।


करण जौहर रणवीर को लेकर फिल्म बनाने के लिए बेताब थे। इसके अलावा रोहित शेट्टी की अजय देवगन के साथ 'सिंघम रिटर्न्स ' कुछ खास नहीं चली थी। वे भी एक ऐसी ही एक्शन फिल्म बनाना चाहते थे। दोनों ने हाथ मिलाया और फटाफट शूट करने के लिए मशहूर रोहित ने 'सिम्बा' बना डाली। 3 दिसम्बर को ट्रेलर रिलीज हुआ और 28 दिसम्बर को फिल्म रिलीज कर दी जाएगी। यानी न ज्यादा टाइम खर्च न ज्यादा पैसा खर्च। करण जौहर और रोहित शेट्टी की 'सिम्बा' (इसका मतलब क्या होता है?) टिपिकल दक्षिण भारतीय मार्का एक्शन फिल्म नजर आ रही है। रोहित शेट्टी इससे पहले 'सिंघम' व 'सिंघम रिटर्न्स' में जो दिखा चुके हैं उससे आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है यह फिल्म। बस फर्क इतना है कि 'सिंघम' में अजय देवगन थे और 'सिम्बा' में इस समय के सबसे पापुलर स्टार रणवीर सिंह हैं।

फिल्म को और ज्यादा सुर्खियों में लाने के लिए इसमें हिरोईन के रूप में सारा अली खान को ले लिया गया। सारा की पहली फिल्म 7 दिसम्बर को रिलीज होगी। यानी उनकी पहली फिल्म देखे बिना ही उन्हें 'सिम्बा' में ले लिया गया। इसके दो फायदे हैं- 1. वे नया चेहरा हैं और युवाओं में उनके प्रति क्रेज होगा। उनकी पहली फिल्म 'केदारनाथ' भी रिलीज हो चुकी होगी तब तक। 2. कोई स्थापित हिरोईन 'सिम्बा' में शायद काम न करती क्योंकि ये फिल्म पूरी तरह से रणवीर की फिल्म नजर आ रही है और रोहित की फिल्मों में हिरोईनों के लिए कुछ ज्यादा होता भी नहीं है।

ट्रेलर देखने के बाद कुछ नयापन नहीं लगा। मराठी बोलते रणवीर सिंह उतने सहज नहीं नजर आए जितने बाजीराव में नजर आए थे। ट्रेलर से गीत संगीत का कोई अनुमान नहीं होता। केवल बैकग्राउंड में 'पुलिस-पुलिस' गीत बज रहा है। कहानी साफ समझ में आ रही है। रणवीर एक भ्रष्ट पुलिस अफसर है जो केवल पैसा कमाने पुलिस में आया है। एक लड़की से रेप होता है और अपनी बहन के प्रेरित करने पर वह बलात्कारियों को नामो निशान मिटाने की कसम खा लेता है। बस इसके बाद वही खून खराबा।
 रेपिस्ट को सजा के तौर पर एनकाउंटर में ठोकने की सिफारिश करती भी यह फिल्म नजर आ रही है। फिल्म में अगर डायलाग मजेदार हुए तो लोगों को रणवीर को किरदार पसंद आ सकता है। वे पहली बार पुलिस अफसर के रोल में आ रहे हैं और बालीवुड का चलन है कि पुलिस अफसर बने बिना यहां नायक सुपर स्टार नहीं बनते। यह फिल्म रणवीर के लिए फायदे का सौदा हो सकती है।

 सारा अली खान के लिए मुझे इसमें कोई गुंजाइश नहीं नजर आ रही है। शायद गानों में डांस वांस करना को मिल जाए उन्हें। बस इससे ज्यादा कुछ नहीं। ट्रेलर देखने के बाद कह सकता हूं कि एक बार देखने लायक ही यह फिल्म नजर आती है। रणवीर का लुक साउथ के नायक जूनियर एनटीआर जैसा नजर आ रहा है इसमें। यहां ट्रेलर के शुरू में सिंघम अजय देवगन भी आते हैं। उनकी कहानी से ही जोड़ने की कोशिश भी की गई है, जो मुझे ज्यादा सही विचार नहीं नजर आया।

- हर्ष कुमार सिंह

फिल्म 28 दिसम्बर 2018 को रिलीज होगी। 


आप भी देखिये 'सिम्बा' का ट्रेलर -



Thursday, 29 November 2018

Deep Review : 2.0

रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म 2.0 भारतीय सिनेमा में वीएफएक्स तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का जीता जागता प्रमाण है। फिल्म में पर्यावरण बचाने के लिए भी संदेश देने का प्रयास किया गया है। फिल्म में मोबाइल रेडिएशन के मुद्दे को गरमजोशी से उठाया गया है। यह ऐसा विषय है जिसके बारे में अभी कोई भी गंभीर नहीं नजर आता। जबकि एक समय ऐसा आएगा कि हम सब इसके दुष्प्रभावों को झेल रहे होंगे और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। इस फिल्म को 14 भाषाओं में डब किया गया हैं।

Rating 4*

full review - watch #HarshKiBaat ः  like, subscribe and share-


watch song of 2.0, Tu hi re



- हर्ष कुमार सिंह 

Thursday, 8 November 2018

DEEP REVIEW : Thugs Of Hindostan


अमिताभ-आमिर की जोड़ी को कर दिया गया वेस्ट 

पिछले कुछ सालों में सामने आई सबसे बड़ी निराशाओं में से एक है ठग्स आफ हिंदोस्तान। अमिताभ बच्चन और आमिर खान को लेकर जो हिट फिल्म बनाई जानी चाहिए थी वह बन नहीं पाई। यह एक बड़ा मौका था फिल्मकारों के लिए जिसे मिस कर दिया गया। अब पता नहीं ये दोनों अभिनेता किसी दूसरी फिल्म में साथ आ पाएंगे या नहीं। निर्माता-निर्देशक ने सोचा था कि उनके हाथ में शोले है जबकि ये आरजीवी की शोले निकली। फिल्म ने किस तरह से दर्शकों को निराश किया यह देखिए समीक्षक हर्ष कुमार सिंह के इन दो वीडियो ब्लॉग मेः-

Rating- 2*


वीडियो देखने के लिए क्लिक करें और subscribe करें Harsh Ki Baat @ YouTube:- 



 - हर्ष कुमार सिंह


Friday, 2 November 2018

Deep PreVIEW : ZERO

बड़ी हिट देने की पुरजोर कोशिश नजर आ रही शाहरुख की 'जीरो'

 
शाहरुख खान की नई फिल्म 'जीरो' उनके कैरियर की सबसे प्रयोगधर्मी मूवी नजर आ रही है। खुद शाहरुख बौने आदमी का रोल कर रहे हैं और हिरोईन अनुष्का शर्मा एक विकलांग लड़की का रोल कर रही हैं। लगता है कि पिछली कई फिल्मों के नतीजे सही न रहने की वजह से किंग खान कुछ नया करने के लिए बेताब थे और इसलिए यह फिल्म बनाई गई है।

हालांकि शाहरुख ने पिछले साल 'जब हैरी मेट सेजल' के रूप में इम्तियाज अली के साथ भी कुछ नया करने की सोची थी लेकिन केवल डायरेक्टर ही नया हो पाया, कहानी पुरानी ढर्रे की (जब वी मेट टाइप की) होने के कारण फिल्म बाक्स आफिस पर नहीं चल पाई। इसके बाद आई 'रईस' के साथ भी कुछ ऐसा ही था। 80 -90 के दशक की पुरानी कहानी थी 'रईस' की जो पैसा तो कमा ले गई लेकिन शाहरुख की सलमान या आमिर जैसी बड़ी हिट देने की आरजू पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में 'जीरो' निश्चित रूप से शाहरुख के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण फिल्म है।

मार्किटिंग:  
शाहरुख हमेशा ही अपनी फिल्मों की तगड़ी मार्किटिंग के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 'चेन्नई एक्सप्रेस' व 'हैप्पी न्यू ईयर' जैसी कमजोर फिल्मों को भी हिट की श्रेणी में ला दिया था। पर अब जमाना बदल रहा है। सिनेमा में जाने वाला दर्शक सोच समझकर पैसा निकालता है। अगर उसे विषय भा जाए तो वह 'बधाई हो' जैसी साधारण बजट की फिल्म पर भी नोट बरसा देता है। शाहरुख को भी 'जीरो' से ऐसी ही उम्मीद होगी। उन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर 2 नवंबर को मुंबई के वडाला स्थित आईमैक्स सिनेमा में इसका ट्रेलर लांच किया। इसमें देश भर की मीडिया का बुलाया गया। शाहरुख व निर्देशक आनंद एल राय (तनु वेड्स मनु) के साथ दोनों हिरोईनें अनुष्का व कैटरीना मौजूद रही। भव्य कार्यक्रम हुआ और ट्रेलर लांच कर दिया गया।

ट्रेलर:  
ट्रेलर अच्छा है। तीन मिनट से अधिक का यह ट्रेलर पूरी फिल्म की कहानी ही बता देता है। बस देखने के लिए यही बचा है कि शाहरुख किस हिरोईन को अपनाता है। मुझे लगता है कि अनुष्का के साथ ही शाहरुख की शादी होगी। कहानी कुछ यूं नजर आती है- बऊआ सिंह मेरठ में रहता है और बौना है। किसी सुंदर लड़की से शादी करना चाहता है। शादी का एजेंट उसे एक लड़की (अनुष्का) की फोटो दिखाता है। जब बऊआ लड़की से मिलने जाता है तो देखता है कि वह तो व्हील चेयर पर चलती है और ठीक से बोल भी नहीं पाती। ठीक उस तरह जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग थे। इसके बाद भी बऊआ उसे पसंद करने लगता है। इसी बीच उसके जीवन में आती है एक बड़ी फिल्म स्टार (कैटरीना)। अब फिल्म यही है कि दोनों में से कौन उसे चुने और वह किसके साथ जाना चाहता है ? यही फिल्म है। ट्रेलर से सब कुछ साफ है बस क्लाईमैक्स नहीं खोला गया है।

आकलनः 
ट्रेलर में फिल्म के गीतों के बारे में ज्यादा नहीं पता चलता है। फिल्म 176 मिनट लंबी बताई जा रही है। जो मेरे हिसाब से काफी लंबी है। लगभग तीन घंटे की फिल्म तभी चल पाती है जब स्क्रिप्ट बहुत ही शानदार हो और संपादन चुस्त। इसके अलावा संगीत भी शानदार होना चाहिए। तभी तीन घंटे तक आदमी थियेटर में बैठ सकता है। मराठी फिल्म 'सैराट' (धड़कन) वाले संगीतकार अजय अतुल ने म्यूजिक दिया है लेकिन गीत कैसे हैं यह साफ नहीं हो सका है ? शाहरुख की पिछली फिल्मों 'रईस', 'जब हैरी मेट सेजल', 'फैन' व 'दिलवाले' का संगीत कुछ खास नहीं चला था। देखते हैं इसमें कैसा संगीत है ?

- हर्ष कुमार सिंह 

trailer of ZERO :-


teaser of ZERO :- 

ये भी देखें- "जीरो" और "2.0" में से कौन लग रही है ज्यादा मजबूत-










Thursday, 18 October 2018

DEEP REVIEW : Badhaai Ho

फिल्म को देखकर कुछ साल पहले आई 'दो दूनी चार' की याद आ जाती है जिसमें ऋषि कपूर व नीतू सिंह ने एक मिडिल क्लास परिवार की कहानी को जीया था। इस तरह की फिल्में सपरिवार देखने में मजा आता है। आपको रिश्तों की कद्र करने का मतलब समझ आ जाएगा। जाइए और फिल्म जरूर देखकर आइए। अच्छा समय बीतेगा आपका।

Rating 3* (edited : rating 5*)

'बधाई हो', फिल्म की पूरी टीम को ऐसी फिल्म बनाने के लिए बधाई। बॉलीवुड के एक बड़े फिल्मकार ने पिछले दिनों कहा था कि इंडस्ट्री में अच्छी कहानियों का अकाल है। उनकी बात सही है। साल में रिलीज होने वाली 100-150 फिल्मों में से 4-5 फिल्में ही ऐसी होती होंगी जिनमें पहले कहानी फाइनल की जाती होगी। बड़े बैनर तो पहले स्टार कास्ट व प्रोजेक्ट के सभी पहलू फाइनल कर लेते हैं और फिर फिल्म शुरू करते हैं। लेकिन जिन 4-5 फिल्मों की मैं बात कर रहा हूं उन्हें देखने के बाद यह साफ हो जाता है कि उनकी कहानी पहले फाइनल हुई। इस साल रिलीज हुई 'अक्टूबर', 'अंधाधुंन' और अब 'बधाई हो' जैसी फिल्में उन्हीं में से हैं। इसके उलट इसी सप्ताह रिलीज हुई दूसरी फिल्म 'नमस्ते इंग्लैंड' प्रोजेक्ट वाली फिल्म है। उसके निर्माता निर्देशक ने पहले सीक्वल (नमस्ते लंदन का) बनाने का फैसला किया और फिर कहानी गढ़ी। शायद स्टारकास्ट भी पहले ही तय हो गई होगी। पर 'बधाई हो' में ऐसा कुछ नहीं है। पहले कहानी चुनी गई फिर स्टारकास्ट। यही इस फिल्म को दूसरों से अलग बना देता है।
फिल्म असाधारण भले ही नहीं है लेकिन एक बार देखने में बिल्कुल भी बुरी नहीं है। आप हंसते हैं, खुशी मनाते हैं और भावुक भी होते हैं। बस एक फेमिली फिल्म में इससे ज्यादा और क्या चाहिए? जितेंद्र कौशिक उर्फ जीतू (गजराज राव) रेलवे में टीटी है और पत्नी प्रियंवदा उर्फ बबली (नीना गुप्ता) से बहुत प्यार करता है। दोनों ही 50 पार कर चुके हैं। बड़ा बेटा नकुल (आयुष्मान खुराना) जवान है और एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता है। कंपनी में साथ ही काम करने वाली रेने (सान्या मल्होत्रा) से प्यार करता है। जीतू का छोटा बेटा भी 12वीं में पढ़ रहा है। जीतू मिडिल क्लास परिवारों की तरह एक आदर्श व्यक्ति है और अपनी मां (सुरेखा सीकरी) का बेहद सम्मान करता है। आम घरों की तरह यहां भी सास बहू में बिल्कुल नहीं बनती। इसके बावजूद सब एक दूसरे से प्यार बहुत करते हैं।

घर में उस समय भूचाल आ जाता है जब पता चलता है कि प्रियंवदा गर्भवती हो गई है। गर्भ 19 सप्ताह का हो चुका है और उसे गिराने में खतरा भी है। प्रियंवदा फैसला करती है कि वह बच्चे को जन्म देगी। दोनों बेटे इस खबर से नाराज हो जाते हैं और मां-बाप से बात करना भी बंद कर देते हैं। मां भी नाराज होती है कि यह कोई उम्र है बच्चे पैदा करने की? सामाजिक रूप से भी परिवार को उपहास झेलना पड़ता है। रेने की मां (शीबा चड्ढा), जो कि नकुल को पसंद करती है लेकिन, उसकी मां के गर्भवती होने की खबर सुनकर नाराज हो जाती है। उसका मानना था कि यह जहालत का प्रतीक है और ऐसे घर में रेने कभी खुश नहीं रह सकेगी। इस बात से नकुल को झटका लगता है। वह अपने परिवार की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाता। जीतेंद्र की मां भी प्रियंवदा के समर्थन में उठ खड़ी होती है। अंत में सब कुछ ठीक हो जाता है और घर में एक बेटी का आगमन होता है। नकुल व रेने की शादी के साथ फिल्म खत्म होती है।
फिल्म की कहानी बढिय़ा है और स्क्रीन प्ले भी अच्छा लिखा गया है। कहानी पूरी तरह से दिल्ली में केंद्रित है। वेस्ट यूपी के खतौली व मेरठ का भी जिक्र आता है और जीतू के परिवार की भाषा शैली भी वेस्ट यूपी की दिखाई गई है। इस क्षेत्र के लोगों को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। पहला हाफ तो हास्य से भरपूर है। इंटरवल के बाद कुछ इमोशनल सीन हैं। निर्देशक अमित रवींद्रनाथ शर्मा को इस इलाके व इस तरह की भाषा व परिवारों की अच्छी खासी जानकारी है इसलिए फिल्म बहुत ही जीवंत बन पड़ी है। सुरेखा सीकरी ने तो बुजुर्ग मां के रोल को एकदम जीवंत कर दिया है। गजराज राव व नीना गुप्ता ने भी शानदार काम किया है। आयुष्मान खुराना व सान्या मल्होत्रा की जोड़ी प्यारी लगती है। बाकी लोगों ने भी काम अच्छा किया है।
संगीतकार तीन-तीन हैं लेकिन गीत बस फिल्म देखते समय ही अच्छे लगते हैं। कोई हिट गीत नहीं बन पाया। दिल्ली की लोकेशंस को बढिया तरीके से शूट किया गया है और तकनीकी पहलू अच्छे हैं। फिल्म को देखकर कुछ साल पहले आई 'दो दूनी चार' की याद आ जाती है जिसमें ऋषि कपूर व नीतू सिंह ने एक मिडिल क्लास परिवार की कहानी को जीया था। इस तरह की फिल्में सपरिवार देखने में मजा आता है। आपको रिश्तों की कद्र करने का मतलब समझ आ जाएगा। जाइए और फिल्म जरूर देखकर आइए। अच्छा समय बीतेगा आपका।

- हर्ष कुमार सिंह  

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