शाहरुख खान की यह फिल्म उनके अपने मन की फिल्म है। यहां शाहरुख ने खुद के भीतर छिपे कलाकार को संतुष्ट करने की कोशिश की है। इसमें वे सुपर स्टार के ग्लैमर से बाहर निकलकर एक गली के किरदार को निभाते नजर आए हैं। जो बौना है और बड़ी बड़ी बातें करने के अलावा कुछ नहीं करता। उसकी जिंदगी में न कोई मकसद है न कोई उम्मीद। फिल्म अभिनेत्री से मिलने का सपना ही देखता रहता है।
इस फिल्म में शाहरुख ने आनंद एल राय के साथ टीम बनाई है जो बड़े सितारों के साथ कम ही काम करते हैं। शाहरुख ने उन्हें राजी कर लिया यह बड़ी बात है और इसके बाद राय ने किंग खान को किंग साइज रोल देने के बजाय उनके लिए बौना किरदार गढ़ दिया।
फिल्म के बार में विस्तार से मेरा आकलन देखने के लिए क्लिक करें नीचे दिया लिंक-
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- हर्ष कुमार सिंह
इस फिल्म में शाहरुख ने आनंद एल राय के साथ टीम बनाई है जो बड़े सितारों के साथ कम ही काम करते हैं। शाहरुख ने उन्हें राजी कर लिया यह बड़ी बात है और इसके बाद राय ने किंग खान को किंग साइज रोल देने के बजाय उनके लिए बौना किरदार गढ़ दिया।
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